
महिला दिवस विशेष : अंजलि- जो न सिर्फ टीबी से लड़ी बल्कि तैयार कर रही लोगों को उसके खिलाफ
कोरबा. एक १९ साल की छात्रा अंजलि लोगों को टीबी के खिलाफ एकजुट कर रही है। कोरबा में मानिकपुर की रहने वाली अंजलि टंडन इस छोटी सी उम्र में अपनी फस्र्ट इयर की पढ़ाई के साथ-साथ लोगों के बीच न सिर्फ टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करती है बल्कि जो पीडि़त हैं उन्हें इससे लडऩे का जज्बा भी प्रदान करती है।
अंजलि बताती है कि वो खुद इस रोग से जूझ चुकी है, लड़ चुकी है ऐसे में उसे ये अच्छे से पता है कि क्या बीतती है उन पर जो इसके पीडि़त होते हैं। इसके बाद उसे इस बात की प्रेरणा मिली और वो लोगों को इस बीमारी से बचाने के लिए जागरूक कर रही है साथ ही जो पीडि़त हैं उन्हें इससे लडऩे के गुर भी सिखा रही है।
अंजलि बताती है कि 2017 में उसके गले में गांठ पड़ गयी और उसे बहुत दर्द होता था। इलाज करवाने के बाद भी कोई फायदा नहीं हो रहा था। एक दिन पड़ोस की महिला ने इस लक्षण के विषय में बताया कि टीबी हो सकता है क्योंकि वो महिला भी इससे पीडि़त थी। इसके बाद अंजलि के घरवाले उसे जिला अस्पताल लेकर गए जहां पहले उसे 7 दिन की दवा दी गयी लेकिन आराम न मिलने पर उसे बताया गया कि उसे टीबी है। अंजलि को 6 महीने के लिए दवा लेने को कहा गया इसके बाद वो ठीक हो गई। इसके बाद उसे इस बात की प्रेरणा मिली कि वो अब टीबी के खिलाफ काम करेगी, लोगों को जागरूक करेगी और मरीजों को लडऩे की हिम्मत देगी।
कैसे शुरू हुई लड़ाई
अंजलि ने बताया कि पिछले साल उसे एक मितानिन निशा भारती ने रीच संस्था के बारे में बताया जो की ऐसे लोगों की तलाश में थे जो टीबी के मरीज रहे हों और पढे-लिखे भी हों। इसके बाद अंजली उस संस्था से जुड़ गई। उसे 3 दिन की ट्रेनिंग के लिए रायपुर भेजा गया। जहां उसे टीबी के मरीजों की पहचान, उनसे वार्तालाप करने के तरीके और उनको परामर्श देने का कौशल प्रदान किया गया। अब वह लोगों के बीच जाकर उनको टीबी के बारे में जानकारी और इससे बचाव के बारे में बताती है।
10 से 15 मरीजों को दे रही संबल
अंजलि वर्तमान में १० से १५ मरीजों के संपर्क में है और उन्हें इस रोग से लडऩे की हिम्मत प्रदान कर रही है। वर्तमान में वो उनसे लगातार मिलती रहती है और उन्हे पूरा इलाज करने की सलाह देती है ताकि वो जल्द से जल्द ठीक हो सकें। वहीं स्कूलों में जाकर, आम लोगों के बीच टीबी के बारे में जानकारी देती है और उनको जागरूक करती है।
- टीबी अब मेरे जीवन का लक्ष्य बन गया है। क्योंकि मैने इसे भुगता है इसलिए अब कोई और कैरियर मुझे नहीं चाहिए। मैं टीबी के पीडि़तों की मदद करना चाहती हूं, इस रोग के खिलाफ लोगों को खड़ा करना चाहती हूं- अंजलि टंडन, टीबी चैंपियन
Updated on:
08 Mar 2019 01:01 pm
Published on:
08 Mar 2019 07:00 am
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