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MCB जिला का headquarter final हुआ, मनेंद्रगढ़ ITI कलेक्ट्रेट बनेगा, 174.56 लाख से भवन का रेनोवेशन होगा

नवीन जिला मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जल्द अस्तित्व में आएगा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्रालय ने १७४.५६ लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दी, पुराने भवन का रेनोवेशन होगा।

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MCB जिला का headquarter final हुआ, मनेंद्रगढ़ ITI कलेक्ट्रेट बनेगा, 174.56 लाख से भवन का रेनोवेशन होगा

MCB जिला का headquarter final हुआ, मनेंद्रगढ़ ITI कलेक्ट्रेट बनेगा, 174.56 लाख से भवन का रेनोवेशन होगा



बैकुंठपुर। नवीन जिला मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर का मुख्यालय चैनपुर(मनेंद्रगढ़) में बनाया जाएगा। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग रायपुर ने १७४.५६ लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। जिससे मनेंद्रगढ़ आईटीआई भवन का रेनोवेशन कराने के बाद कलेक्ट्रेट बनाया जाएगा। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग रायपुर के अवर सचिव शत्रुहन यादव के हस्ताक्षर से नवीन कलेक्ट्रेट बनाने अधोसंरचना विकास एवं पर्यावरण उपकर निधि से व्यय की स्वीकृति दी गई है। जिससे बुनियादी सुविधाएं विकसित सहित अन्य निर्माण कार्य कराए जाएंगे। मामले में निर्माण कार्यों का उपयोगिता प्रमाण पत्र संचालक भू अभिलेख रायपुर को शीघ्र उपलब्ध कराने निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने १५ अगस्त २०२१ को मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर को नवीन जिला बनाने घोषणा की थी। फिलहाल ओएसडी प्रशासन और ओएसडी पुलिस की पदस्थापना कर दी गई है। गौरतलब है कि अविभाजित सरगुजा जिला से अलग होकर 25 मई 1998 को नवीन कोरिया जिला का गठन हुआ था। जिसका मुख्यालय बैकुंठपुर में बना है। जिसका क्षेत्रफल 5977.70 वर्ग किलोमीटर है।

यह है अविभाजित कोरिया
जनसंख्या ६५८९४३
तहसील ०८
रकबा २४६४२० हेक्टेयर
गांव ६६२
ग्राम पंचायत ३६३
पटवारी हल्का १५८
ब्लॉक ०५

ये है नवीन एमसीसी जिला
विवरण एमसीबी
रकबा(हे) १७३०८७
जनसंख्या ४११५१५
पटवारी हल्का १०१
गांव ४१२
ग्राम पंचायत २३३
तहसील ०७
(कोटाडोल व बचरापोंड़ी घोषित)
ब्लॉक ०३(कोटाडोल प्रस्तावित)

सौ साल बाद पुन: दो भागों में विभाजित हुआ कोरिया: डॉ पांडेय
मनेंद्रगढ़। इतिहासकार डॉ विनय विनोद पांडेय ने नवगठित एमसीबी जिले के इतिहास का विवरण बताया है। उनका कहना है कि कोरिया रियासत में 1600 ई तक बालंदो का शासन था। 1750 के मैनुपरी के चौहान वंश के दलथम्बन शाही व धारामल शाही कोरिया पहुंचे। कोरिया में गोड़ों के बाद चौहान वंश का राज्य हुआ। वहीं ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों नागपुर के मोंडेजी भोसले के परास्त होने के बाद सभंवत: छत्तीसगढ़ के राज्य ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन आ गए। इसी के साथ 1818 में कोरिया रियासत भी आ गया। 24 दिसंबर 1819 में राजा गरीब सिंह के स्वीकृत करारनामा के अनुसार कोरिया राज्य 400 रुपए वार्षिक अंग्रेजों को देगा। चांगभखार कोरिया की सांमती अधीनता होने के कारण 386 रुपए कोरिया राज्य के माध्यम से कंपनी को देगा। वर्ष 1848 में एक अन्य अनुबंध के अनुसार चांगबखार रियासत देय राशि सीधे ईस्ट इंडिया कंपनी को देने लगा और कोरिया रियासत से अलग होकर चांगबखार स्वतंत्र अस्तित्व में आ गया। यहां के राजा को भैया की उपाधि से सम्मानित किया गया। अब कोरिया लगभग सौ वर्षो बाद पुन: दो भागों में बंट गया और नवीन जिले का निर्माण किया गया है। जिसका मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ में बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मनेन्द्रगढ़ का मूल नाम कारीमाटी था। क्योंकि इसके आस-पास भूमि पर कोयला का भण्डार तथा यहां की भू-भाग की मिट्टी काली थी। वर्ष 1927 में कारीमाटी में भीषण आग लग गई थी। जिससे यह क्षेत्र जलकर राख हो गया। वर्ष 1930 में रेलवे लाइन पहुंची, तब राजा ने रेल्वे स्टेशन के निकट नगर बसाने का निर्णय लिया। इस स्थान का नाम अपने तृतीय पुत्र महेन्द्र प्रताप सिंहदेव के नाम पर मनेन्द्रगढ़ कर दिया। रेलवे लाइन आने के कारण इस क्षेत्र का पर्याप्त विकास होगा। वर्ष 1936 में मनेन्द्रगढ़ को तहसील मुख्यालय बनाया गया। जनकपुर का चांगभखार रियासत से संबंध होने के कारण रियासत का नामकरण चांगदेवी के नाम पर किया गया था। यह रियासत की कुल देवी मानी गई है। चूंकि इतिहासकार कनिंधम ने कोरिया रियासत में स्थित रामगढ़ को चित्रकुट माना है। चांगभखार के मवई नदीं के तट पर एक गुफा है। जिसे सीमामढ़ी हरचौका नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि प्रभु श्रीराम के वनवास काल का पहला पड़ाव यहीं था। भरतपुर के पास सीता मढ़ी हरचौका अर्थात सीता की रसोई के नाम से प्रसिद्ध है। जिससे स्थानीय लोग इस स्थान को रामायण काल से जोड़ते हैैं।


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