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मकर संक्रांति पर आस्था का महासंगम बनता है सिद्ध बाबा धाम, जानें 1928 में खनन मजदूरों की पूजा से लेकर केदारनाथ-शैली के भव्य मंदिर तक का सफर

Makar Sankranti 2026: घने जंगलों, ऊंची-नीची पहाड़ियों और शांत वातावरण के बीच स्थित सिद्ध बाबा धाम आज केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और विकास की जीवंत कहानी बन चुका है।

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आस्था की पहाड़ी पर शिव का वास (फोटो सोर्स- DPR)

आस्था की पहाड़ी पर शिव का वास (फोटो सोर्स- DPR)

Makar Sankranti 2026: घने जंगलों, ऊंची-नीची पहाड़ियों और शांत वातावरण के बीच स्थित सिद्ध बाबा धाम आज केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और विकास की जीवंत कहानी बन चुका है। मकर संक्रांति के अवसर पर यह स्थल श्रद्धालुओं से गुलजार हो उठता है और पूरा क्षेत्र मेले, भक्ति और उल्लास के रंग में रंग जाता है।

कुछ वर्ष पहले तक जहां यह प्राचीन शिव मंदिर समय की मार झेल रहा था, वहीं आज केदारनाथ धाम की तर्ज पर निर्मित भव्य मंदिर श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। खासकर रात्रि में जब मंदिर रोशनी से जगमगाता है, तो सिद्ध बाबा पर्वत पर मानो दिव्यता स्वयं उतर आती है।

खनन से शुरू हुई शिव भक्ति की यात्रा

जिले के पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के नोडल अधिकारी व इतिहासकार डॉ. विनोद पांडेय बताते हैं कि सिद्ध बाबा धाम की आस्था की जड़ें वर्ष 1928 से जुड़ी हैं। उस समय कारीमाटी (वर्तमान झगराखांड) क्षेत्र में कोयला खनन का कार्य प्रारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश और बिहार से आए श्रमिकों ने इस पर्वत पर खुले में स्थित शिवलिंग की पूजा शुरू की। धीरे-धीरे साधु-संतों और तपस्वियों का यहां आगमन होने लगा। वे महीनों तक इसी पहाड़ी पर साधना करते, शिव आराधना करते और फिर आगे बढ़ जाते। कठिन रास्तों और घने जंगलों के कारण आरंभ में स्थानीय लोग कम ही यहाँ पहुँच पाते थे, लेकिन समय के साथ यह स्थल ग्राम देवता और आस्था के केंद्र के रूप में स्थापित हो गया।

जनसहयोग से बदली तस्वीर

स्थानीय मंदिर समिति, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के सहयोग से मंदिर का कायाकल्प हुआ। जिला प्रशासन द्वारा बिजली, पानी, सीढ़ी और चबूतरे जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। आज सिद्ध बाबा धाम न केवल पूजा स्थल है, बल्कि जिले का एक उभरता हुआ धार्मिक पर्यटन केंद्र भी बन गया है।

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति: जब पहाड़ी बन जाती है मेला

मकर संक्रांति के दिन सिद्ध बाबा धाम का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है। हजारों श्रद्धालु तिल-गुड़ अर्पित कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिर समिति द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जहां जाति-धर्म से ऊपर उठकर सभी श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। मेले में पूजा सामग्री, बच्चों के खिलौने, प्रसाद, तिल-गुड़ के लड्डू और पारंपरिक व्यंजनों की दुकानों से रौनक बनी रहती है।

सीमाओं से परे आस्था

मध्यप्रदेश की सीमा से सटा होने के कारण यहाँ छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुँचते हैं। इस दौरान जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की सक्रियता व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भविष्य की ओर बढ़ता सिद्ध बाबा धाम

आज सिद्ध बाबा धाम इतिहास, आस्था और आधुनिक सुविधाओं का सुंदर संगम बन चुका है। यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन की अपार संभावनाएँ भी समेटे हुए है। मकर संक्रांति पर उमड़ती भीड़ इस बात का प्रमाण है कि सिद्ध बाबा धाम आने वाले समय में जिले की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।


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