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राजपत्र अधिसूचना: छत्तीसगढ़ में 2004 से पुरानी पेंशन लागू, लेकिन शिक्षा विभाग के रेकॉर्ड में 2018 से सेवा की गणना होगी

पुरानी पेंशन का मामला, संविलियन की सेवा शर्त बिंदु क्रमांक-४ के अनुसार शिक्षाकर्मियों की सेवा की गणना, पेंशन प्रकरण फंसेगा।

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राजपत्र अधिसूचना: छत्तीसगढ़  में 2004 से पुरानी पेंशन लागू, लेकिन शिक्षा विभाग के रेकॉर्ड में 2018 से सेवा की गणना होगी

राजपत्र अधिसूचना: छत्तीसगढ़ में 2004 से पुरानी पेंशन लागू, लेकिन शिक्षा विभाग के रेकॉर्ड में 2018 से सेवा की गणना होगी



बैकुंठपुर। शिक्षाकर्मियों की लंबी लड़ाई के बाद छत्तीसगढ़ में पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दिया गया है। लेकिन संविलियन की सेवा शर्त बिंदु क्रमांक-४ के अनुसार सेवाकाल की गणना होने से बड़ी संख्या में शिक्षाकर्मियों की पुरानी पेंशन योजना से बाहर हो जाएंगे। वर्ष १९९८ में भर्ती होने वाले १६००० शिक्षाकर्मियों के मामले में १० साल सेवा अनिवार्य का पेंच फंस सकता है।
जानकारी के अनुसार ११ मई २०२२ को छत्तीसगढ़ राजपत्र में नवीन अंशदायी पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने अधिसूचना का प्रकाशन हुआ है। पुरानी पेंशन योजना १ नवंबर २००४ से लागू किया गया है। जिसमें उल्लेख है कि नवीन अंशदायी पेंशन के तहत शासकीय सेवकों के वतन से की जा रही कटौती १० फीसदी मासिक अंशदान की कटौती १ अप्रैल २०२२ से समाप्त की जाएगी। वहीं सामान्य भविष्य निधि नियम के अनुसार मूल वेतन का न्यूनतम १२ फीसदी कटौती की जाएगी। पुरानी पेंशन योजना लागू होने की तिथि के मध्य सेवानिवृत्त या मृत कर्मचारियों के प्रकरणों में पात्र शासकीय सेवक व परिवार को लाभ दिया जाएगा। मामले में ११ मई २०२२ को वित्त विभाग मंत्रालय महानदी भवन रायपुर के संयुक्त संचिव के हस्ताक्षर से आदेश जारी हुआ है। जिसमें समस्त विभाग, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, कलक्टर को नवंबर २००४ से पुरानी पेंशन योजना लागू करने निर्देश दिए गए थे। वहीं छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षाविभाग मंत्रालय रायपुर से जारी ३० जून २०१८, संविलियन निर्देश क्रमांक-१ में संविलियन की सेवा शर्त बिंदु क्रमांक-०४ के अनुसार शिक्षक एलबी(शिक्षाकर्मी) की १ जुलाई २०१८ से सेवाकाल की गणना करने का निर्णय लिया गया है। मामले में वर्ष १९९८ में भर्ती होकर कार्य करने और २०२८ तक सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षाकर्मियों को पेंशन नहीं मिलेगी। वित्त विभाग की गाइडलाइन के हिसाब से शासकीय सेवकों की १० साल सेवा कार्य करने के बाद पेंशन प्रकरण बनता है।

प्रदेश में १.८० लाख शिक्षाकर्मी, जिनकी सेवा अवधि ६-२० साल तक शून्य माना जाएगा
जानकारी के अनुसार वर्ष १९९८ से २०१२ तक भर्ती होने वाले करीब १.८० लाख शिक्षाकर्मी कार्यरत हैं। जिनकी सेवा अवधि ६-२० साल तक शून्य माना जाएगा। क्योंकि शिक्षा विभाग ने शिक्षाकर्मियों की सेवा अवधि को १ जुलाई २०१८ से गणना करने का निर्णय लिया गया है। वर्ष १९९८ में नियुक्त करीब १६००० शिक्षाकर्मी कार्यरत हैं। वहीं पुरानी पेंशन के लिए १० साल की सेवा अवधि जरूरी है। इतने साल तक सेवा करने पर मूलवेतन का २५ फीसदी राशि पेंशन मिलेगी।

एलबी संवर्ग के सहायक शिक्षक, शिक्षक व व्याख्याता एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि सहित पुरानी पेंशन की गणना कर पेंशन तथा उपादान दिया जाए।
राजेंद्र प्रसाद पटेल, जिलाध्यक्ष प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ कोरिया