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किया ऐलान- मानना ही होगा कानून, नहीं तो पत्थलगढ़ी को सांसद-विधायक और दीवारों को चुनेंगे सरपंच-सचिव

सर्व आदिवासी समाज व सर्व अंबेडकर विचार मंच का धरना-प्रदर्शन, कहा- सरकार बात नहीं सुनेगी तो ऐसा करने को हो जाएंगे विवश

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Adivasi society protest

Sarv Adivasi samaj

बैकुंठपुर. सर्व आदिवासी समाज व सर्व अंबेडकर विचार मंच के तत्वावधान में नगर पालिका प्रांगण में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन व आमसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान जशपुर में आदिवासी समाज के मुखिया को रिहा करने और रुढ़ी प्रथा व प्रवृत्त विधि की अवमानना व अपमान करने वाले आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज करने की गुहार लगाई गई।

उन्होंने मंच से ऐलान किया कि हर हाल में पत्थलगढ़ी कानून मानना होगा। यदि केंद्र व राज्य सरकार हमारी बात नहीं मानेगी तो पत्थलगढ़ी को हम सांसद व विधायक बनाएंगे।


नगर पालिका बैकुंठपुर के पूर्व उपाध्यक्ष ठाकुर विजय सिंह ने कहा कि पत्थरगढ़ी कानून का हर हाल में मानना होगा। केंद्र व राज्य सरकार हमारी बात नहीं सुनेगी तो हम पत्थरगढ़ी को अपना विधायक-सांसद बनाएंगे और दीवारों को सरपंच-सचिव चुना जाएगा। उन्होंने कहा भाजपा सरकार आदिवासी समाज व रुढ़ीवादी का शोषण करती है।

85 फीसदी रुढ़ीवादी समाज शोषित है। भाजपा की सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकना है। आदिवासी समाज के कानूनी सलाहकार एस. रवि ने कहा कि आपके गांव में सरपंच व मुखिया की अनुमति के बिना कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकती है। इसी बात को लेकर हमारे समाज ने आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। इसे लेकर स्थानीय मंत्री ने अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया था।

भारत के संविधान ने आदिवासी समाज को बहुत बड़ा अधिकार व शक्ति दी है। इसको आज तक हम फॉलो नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि पत्थरगढ़ी को लेकर किसी ने भूत कहा तो किसी ने मारकर भगाने की बात कही है।

कार्यक्रम को जनपद अध्यक्ष सूर्य प्रताप सिंह कांग्रेस उपाध्यक्ष गुलाब कमरो व गोड़वाना अतिरिक्त प्रदेश उपाध्यक्ष संजय कमरो ने संबोधित किया। आमसभा में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रबल प्रताप जूदेव व उनके साथियों को गिरफ्तार करने और आदिवासी समाज के मुखिया को फर्जी अपराध को रद्द करने की गुहार लगाई है।


रुढ़ी प्रथा व प्रवृत्त विधि का अवमानना व अपमान
राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में लिखा है कि केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री, निर्वाचित जनप्रतिनिधि और राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रुढ़ी प्रथा व प्रवृत्त विधि से अनिष्ट प्रकट कर अपमान और कानून व विधियों की अवमानना की है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भड़काकर पत्थरगढ़ी को तोड़कर आदिम जाति आदिवासी की सांस्कृतिक व धार्मिक भावना को भड़काया है।