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हॉर्टिकल्चर कॉलेज: चिरमिरी बस स्टैंड में अस्थायी कक्षाएं लगेंगी, रंगरोगन कर तैयार

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले का मामला, चिरमिरी में कॉलेज-छात्रावास भवन निर्माण कराने करीब १५ करोड़ है प्रस्तावित।

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बैकुंठपुर। मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले में प्रस्तावित नवीन हॉर्टिकल्चर कॉलेज की पोड़ी बस स्टैंड में अस्थायी रूप से कक्षाएं लगेंगी। फिलहाल बस स्टैंड का रंगरोगन करा तैयार कर लिया गया है। महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय सांकरा पाटन दुर्ग छत्तीसगढ़ से चिरमिरी में प्रस्तावित नवीन हॉर्टिकल्चर संबंध होगा। जानकारी के अनुसार वर्ष २०२३-२४ से चिरमिरी में हॉर्टिकल्चर कॉलेज खुलेगी। वहीं जिला प्रशासन ने वेस्ट चिरमिरी पोड़ी में ५५ एकड़ और डोमनहिल एरिया में ७४ एकड़ जमीन चिह्नित कर रखी है। लेकिन विश्वविद्यालय की एक्सपर्ट टीम ने चिह्नित जमीन को उबड़-खाबड़ व पथरीली बताकर हाथ खींच लिया है। पोड़ी में चिह्नित ५५ एकड़ जमीन को पत्थर व खाई होने और डोमनहिल की जमीन को आधे क्षेत्रफल में जलभराव व पहाड़ी एरिया फंसने के कारण अनुपयोगी बता दिया है। नवीन हॉर्टिकल्चर कॉलेज परिसर के लिए नई जगह जमीन आवंटित करने की मांग रखी है। गौरतलब है कि नए शिक्षण सत्र से कॉलेज में पढ़ाई शुरू होनी है। चार वर्षीय बीएससी(हॉर्टिकल्चर) की पढ़ाई होगी। राज्य सरकार ने सरगुजा संभाग में चार नवीन हॉर्टिकल्चर कॉलेज खोलने अनुमति दी है। वहीं जशपुर कोतबा, बलरामपुर रामानुजगंज में कॉलेज खोलने १५.५ करोड़ व १४.९१ करोड़ की स्वीकृति मिल चुकी है। चिरमिरी सहित अन्य जिले में हॉर्टिकल्चर कॉलेज खोलने पर जल्द मुहर लगेगी।

नगर निगम एरिया में है अस्थायी कॉलेज के लिए चयनित स्थल

जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय प्रबंधन ने चिरमिरी में अस्थायी रूप से कक्षाएं संचालित करने आईटीआई के सामने निर्मित और कई साल से बेकार बड़े बस स्टैंड व यात्री प्रतीक्षालय का चयन किया है। अस्थायी कक्षाएं के लिए भी विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा। एनओसी मिलने के बाद विवि प्रबंधन जरूरत के हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएगा। यह एरिया नगर निगम चिरमिरी और जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ से करीब १७ किलोमीटर दूर चिरमिरी में पड़ता है। गौरतलब है कि नवीन हॉर्टिकल्चर कॉलेज परिसर बनाने करीब ७५ एकड़ जमीन की जरूरत है। मामले में चिरमिरी में मांग से अधिक अलग-अलग स्थल पर १२९ एकड़ जमीन मिली है। लेकिन उबड़-खाबड़, पथरीली व जलभराव एरिया होने के कारण अनुपयोगी साबित हुआ। मामले में विश्वविद्यालय प्रबंधन ने दूसरे स्थान पर नई जमीन आवंटन कराने की बात कह रहा है।