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करमा महोत्सव: मांदर बजाकर ताल ठोकी, रातभर जमकर थिरके, खेले गुलाल-अबीर

चरचा कॉलरी श्रमवीर स्टेडियम में कार्यक्रम.

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बैकुंठपुर। चरचा कॉलरी श्रमवीर स्टेडियम में सोमवार की रात में करमा महोत्सव मनाया गया। इस दौरान लोग मांदर की थाप पर थिरके, मांदर बजाकर जमकर ताल ठोकी। महोत्सव में आधी रात से सुबह तक विभिन्न जिले से पहुंची टीम ने करमा नृत्य की मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी। वहीं मंगलवार को सुबह डीजे की धुन पर शोभायात्रा निकालकर विसर्जन किया गया। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि संसदीय सचिव अंबिका सिंहदेव और कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व मंत्री भइयालाल राजवाड़े ने विधि-विधान से पूजा कर महोत्सव का शुभारंभ किया। वहीं कार्यक्रम स्थल पर प्रांगण के बीच में करम डार लगाकर चारों ओर व्रती महिलाएं ज्वार को सजा रखी थीं। निर्धारित समय पर समाज के स्थानीय बैगा ने विधि-विधान से करमडार(करम देवता) की पूजा अर्चना कर व्रती महिलाओं को करम देवता की कथा सुनाई। कार्यक्रम स्थल पर आधी रात से लेकर सुबह तक विभिन्न टीम ने अलग-अलग प्रस्तुति देकर मन मोह लिया और दर्शकों का रातभर मनोरंजन किया। जिससे दर्शक रातभर कार्यक्रम स्थल पर अपनी-अपनी जगह से चिपके नजर आए। अतिथियों ने कहा कि करम देवता की पूजा करने वाले के घर में हमेशा खुशहाली रहती है और समृद्धि आती है। छत्तीसगढ़ी परंपराओं पर आधारित त्योहार पर सार्वजनिक छुट्टी मिलती है। जिससे छत्तीसगढी संस्कृति संरक्षित होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मौजूद थे।

छठ घाट में करमडर-ज्वार विसर्जित, भीड़ उमड़ पड़ी

श्रमवीर स्टेडियम से मंगलवार सुबह करमडार, ज्वार का विसर्जन करने शोभायात्रा निकाली गई। इस अवसर पर बाजे-गाजे के साथ लोग नाचते-झूमते नजर आए। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए और यात्रा में बड़ी लंबी लाइन लगी थी। शोभायात्रा श्रमवीर स्टेडियम से निकली और चरचा कॉलरी के विभिन्न रास्ते से होकर छठ घाट पहुंची। इस अवसर पर महिलाएं व पुरुषों ने एक-दूसरे गुलाल व अबीर लगाकर शुभकामनाएं दी। छठ घाट में बैगा ने विधि-विधान से पूजा अर्चना कर करमडार, ज्वार का विसर्जन कराया।