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परंपरा : वर पक्ष को जमकर शराब पिलाते ही ‘शादी का रिश्ता’ हो जाता है पक्का

खडग़वां विकासखंड के ग्राम पंचायत देवाडांड़ स्थित अगरिया समाज में वर्षों पुरानी चली आ रही है परंपरा, जागरुकता के अभाव में हो रहे बाल-विवाह

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Pranayraj rana

Jan 10, 2017

people of Agariya society

Semlal and her family

चिरिमिरी.
कोरिया जिले के खडग़वां विकासखंड के ग्राम पंचायत देवाडांड़ के अगरिया समाज में शादी-ब्याह के लिए पुरानी परंपरा बरकरार है। शादी-विवाह तय करने से पहले वधू पक्ष के लोग वर पक्ष को खूब दारू पिलाते हैं और शादी की सारी शर्तों को मनवाकर रिश्ता पक्का कर लेते हैं। वहीं समाज में परंपरा के अनुसार नाबालिग वर-वधू की भी शादी करा दी जाती है। इससे शादी की निर्धारित उम्र पहुंचने तक वे 2-3 बच्चों के माता-पिता बन जाते हैं।


जानकारी के अनुसार मनेंद्रगढ़ विधायक आदर्श ग्राम उधनापुर से लगे ग्राम पंचायत देवाडांड़ में अगरिया समाज के लोग बड़ी संख्या में निवासरत हैं। समाज में शादी-ब्याह करने के लिए पुरानी परंपरा बरकरार है।


अगरिया समाज के ग्राम देवाडांड़ निवासी सेमलाल पिता मोहन अगरिया का विवाह करीब 10 से 12 वर्ष की आयु में कर दिया गया था, जिसकी पत्नी पार्वती की आयु 20 वर्ष है। कम उम्र में शादी होने के कारण वर्तमान में उनके4 बच्चे हंै। सबसे बड़ी पुत्री कौशल्या 7 वर्ष, दूसरी पुत्री रमालिया 4 वर्ष, तीसरीे पुत्री समलिया 2 वर्ष और चौथे पुत्र ओम प्रकाश की आयु 7 माह है।


सेमलाल ने बताया की बड़े बुजुर्ग जिस लड़की से अपने पुत्र का विवाह करना चाहते है। उस लड़की के पिता को शराब पिला कर विवाह की सारी बातें मनवा ली जाती है और वर-वधू का विवाह कर दिया जाता है। विवाह के पहले शराब पिलाना समाज का एक रिवाज है। जो कि उनके पूर्वजों से चलते आ रहा है।


सेमलाल का विवाह भी पुरानी रीति-रिवाजों के मुताबिक किया गया है। समाज के लोग आज भी अपने पुराने रिवाजों का पालन कर अपना जीवन-यापन करते है और अपने समाज के पूर्वजों के बताए रास्ते पर चल रहे हैं। आने वाली पीढ़ी को भी ये इन्हीं रिवाजों की जानकारी देते हैं।


सरकारी योजनाओं से कोसों दूर है समाज

राज्य सरकार द्वारा बाल विवाह रोकने,सामाजिक कुरीतियां दूर करने कई योजनाएं चलाई जा रही है। लेकिन अगरिया समाज योजनाओं से कोसों दूर है और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। समाज के लोग बाल विवाह सहित अन्य कानून से अनभिज्ञ हैं। जिससे नाबालिग बच्चों की भी शादी करा दी जाती है।


पूर्वजों की बनाई हुई है परंपरा

हमारे समाज में यह परंपरा है। जो पूर्वज बता गए हैं। हमाज आज भी बहुत पिछड़ा हुआ है। पुरानी परंपरा के अनुसार समाज में शादियां कराई जाती है। समाज को धीरे-धीर जागरूक किया जा रहा है। पहले की अपेक्षा कुछ सुधार हुआ है।

कमल साय अगरिया,
अध्यक्ष अगरिया समाज व उप सरपंच ग्राम बगोढ़ा


जागरुक करने की है जरूरत

योजनाओं की जानकारी के अभाव के कारण ऐसे विवाह होते हंै। इनको जागरूक करने की जरुरत है। विवाहिता की वर्तमान आयु को देखते हुए यह मामला पुराना है। वर्तमान में ऐसा नहीं होता है। जानकारी कर जागरूक किया जाएगा।

श्याम बिहारी जायसवाल,
विधायक मनेंद्रगढ़


ली जाएगी जानकारी

मामले की जानकारी नहीं है। अगर उनके समाज में ऐसा होता है तो उनको योजनाओं की जानकारी देना हमारी पहली प्राथमिकता है। बाल विवाह अपराध की श्रेणी में आता है। जल्द ही संबंधित अधिकारी को भेज कर जानकारी ली जाएगी।

एस. प्रकाश,
कलेक्टर

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