
मनेंद्रगढ़ में आजादी से पहले 486 परिवार बसे, बंटवारे से 1090 बढ़ गए, जमीन का मालिकाना हक मिलने में पेंच?
बैकुंठपुर। मनेंद्रगढ़ में आजादी से पहले बसे परिवारों के पास नजूल दस्तावेज नहीं होने के कारण जमीन का मालिका हक मिलने में पेंच फंसा हुआ है। मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिला उद्घाटन के साथ ही मामले का निराकरण होने की उम्मीद जमी है। मनेंद्रगढ़ में वर्ष 2020-21 तक आंतरिक नजूल में 892, बाह्य नजूल में 198 सहित कुल १०९० कब्जेदारों का नाम दर्ज है।
मनेन्द्रगढ़ मेन मार्केट एवं अन्य स्थानों पर वर्ष 1952-53 में मालगुजार के माध्यम से नजूल भूमि पर कब्जे के आधार पर 486 कब्जेदारों के नाम दर्ज हैं। परिवार बढऩे और जमीन का बंटवारे होने के बाद १०९० बढ़ गए हैं। कोरिया रियासत के समय खसरा क्रमांक 143 रकबा, 113.57 एकड़ के कब्जेधारियों का वर्ष 1943-44 से 1947-48 तक जिला अभिलेखागार में रेकार्ड है। जो कोरिया स्टेट भूखण्ड एवं मकान के किराया का किश्तबन्दी खतौनी रजिस्टर में अंकित हैं। जांच में पाया गया कि कब्जेदारों के पास नजूल संधारण खसरा के अतिरिक्त अन्य अभिलेख नहीं है। कब्जेदारों का तर्क है कि रियासतकाल में कब्जे के आधार पर अभिलेखों में भूमि दर्ज कराई गई थी। उसी भूमि पर आवासीय व व्यावसायिक निर्माण कर काबिज हैं। मामले में नजूल संधारण खसरा के अतिरिक्त अन्य अभिलेख व पट्टा नहीं होने से नवीनीकरण का कार्य व व्यवस्थापन, स्थाई पट्टों का भूमिस्वामी हक मिलने में पेंच फंसा है। क्योंकि तहसील कार्यालय एवं जिला अभिलेखागार में नजूल मनेन्द्रगढ़ का नक्शा उपलब्ध नहीं है। न ही नजूल मनेन्द्रगढ़ के अलग से सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त होने का कोई प्रमाण है।
रेकॉर्ड में इतने काबिज हैं
1943-44 478
1944-45 477
1945-46 461
1946-47 458
1947-48 473
2020-21 १०९०
ये पाया गया नजूल अधिकारी की जांच में
-मनेन्द्रगढ़ के मिसल बंदोबस्त वर्ष 1944-45 एवं अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 के खसरा क्रमांक 143 रकबा, 113.57 एकड़ आबादी मद में अंकित है।
-वर्ष 1952-53 में पहली बार नगर मनेन्द्रगढ़ के नजूल संधारण खसरा तैयार हुआ। खसरे अनुसार आंतरिक नजूल में कुल 486, बाह्य नजूल में कुल 186 कब्जेदारों के नाम हैं।
- वर्ष 1947-48 के नजूल संधारण खसरा, कब्जेदारों का नाम कोरिया स्टेट भूखण्ड एवं मकान के किराया के लिए किश्तबंदी खतौनी रजिस्टर में दर्ज है।
-जिला अभिलेखागार में उपलब्ध मनेन्द्रगढ़ के नजूल संधारण खसरा वर्ष 1953-54 से 1956-57 में कुल 627 कब्जेदारों के नाम हैं। लेकिन किसी कब्जेदार के पास कोई पट्टा नहीं है। किसी को पट्टे में देने के संबंध में कोई भी प्रकरण, पंजी या अन्य दस्तावेज नहीं है।
- जिला अभिलेखागार में उपलब्ध वर्ष 1969-70 से 1972-73 तक नगर मनेन्द्रगढ़ के नजूल संधारण खसरा में कुल 740 कब्जेदारों के नाम हैं।
तत्कालीन सरगुजा कलक्टर ने लीज समाप्त करने आदेश दिए थे
तत्कालीन सरगुजा कलक्टर अंबिकापुर से 8 अगस्त १९91 में निर्देश जारी हुआ था। जिसमें 578 नजूल भूखण्ड, जो वर्ष 1945-46 की लीज भूमि है। उस नजूल भूखण्ड की लीज समाप्ति अवधि 1975 अंकित करने उल्लेख किया है। जबकि लीज का कोई भी प्रकरण पंजीबद्ध नहीं है और न ही लीज विलेख उप पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत कराई गई है। फिर भी लीज भूमि मानकर समाप्ति अवधि 31 मार्च 1975 दर्ज करने निर्देश दिए थे। मामले में तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ने संधारण खसरा के कालम 8, जिसमें पट्टा समाप्ति की अवधि रहती है। उसमें 31 मार्च 1975 अंकित कर दिया है। साथ ही कार्यालय राजस्व निरीक्षक नजूल मनेन्द्रगढ़ में संधारित लीज स्वीकृत रजिस्टर में शासन द्वारा जारी 62 लीजधारियों का नाम दर्ज है।
तत्कालीन कलक्टर के आदेश बाद मामले में जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट राजस्व विभाग रायपुर में प्रस्तुत है। सिर्फ घोषणा करना बाकी है। उम्मीद है नवीन जिला उद्घाटन के समय मुख्यमंत्री घोषणा कर सकते हैं।
रघुनाथ, संयोजक नजूल संघर्ष समिति मनेंद्रगढ़
Published on:
08 Sept 2022 07:29 pm
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