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chhattisgarh की गोल्डन दादी-मम्मी: उम्रदराज में लाठी लेकर चलना छोड़ पावरलिफ्टिंग में जीत रहीं सोना

- कोई शुगर पेशंट तो किसी को पैरासिलिसिस अटैक, तो कोई गंभीर बीमारी से पीडि़त और आठ बार ऑपरेशन करा चुकी हैं।

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chhattisgarh की गोल्डन दादी-मम्मी: उम्रदराज में लाठी लेकर चलना छोड़ पावरलिफ्टिंग में जीत रहीं सोना

chhattisgarh की गोल्डन दादी-मम्मी: उम्रदराज में लाठी लेकर चलना छोड़ पावरलिफ्टिंग में जीत रहीं सोना



बैकुंठपुर। आपने वर्ष २०१९ में आई बॉलीवुड फिल्म सांड की आंख जरूर देखी होगी, जिसमें उत्तरप्रदेश के बागपत जिले और देश की सबसे उम्रदराज महिला शूटर चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर के हौसलों को परदे पर देखा और जाना होगा। आज वैसी ही ढलती उम्र में सीखने की ललक, अपनी खुद की पहचान बनाने की जुनून रखने और पॉवरलिफ्टिंग में सोना जीतने वाली गोल्डन दादी-मम्मी से मिलवाएंगे।
ये गोल्डन दादी-मम्मी छत्तीसगढ़ के अविभाजित कोरिया(चिरमिरी-मनेंद्रगढ़ शहर) की रहनी वाली हैं। सबसे पहले बात करते हैं, गोल्डन दादी कमला देवी की। इनकी उम्र 80 साल है। जिसने नेशनल और स्टेट पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में ३ गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं और नेशनल चैंपियनशिप के लिए तैयारी में जुटी हैं।
गोल्डन दादी को पिछले ४५ साल से शुगर है। डॉक्टर ने पैदल चलने सलाह दी थी, फिर धीरे-धीरे जिम जाना शुरू कीं। रोजाना अभ्यास और कड़ी मेहनत को देख जिम कोच अमित टोप्पो ने मनेंद्रगढ़ में जिला स्तरीय पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में हिस्सा लेने प्रोत्साहित किया। जिसमें पहली में ही गोल्ड मेडल जीतीं। फिर उनके कदम नहीं रुके और स्टेट से लेकर नेशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर कई बार गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। उन्होंने मोटिवेट करने के लिए कोच धमेंद्र दास, अमित टोप्पो, उदल को श्रेय दिया है।

पैरालिसिस पेशेंट: स्टेट में १२, नेशनल चैंपियनशिप में ५ बार गोल्ड, दो बार स्ट्रॉन्ग वूमेन का खिताब जीतीं
अब बात करते हैं 6४ साल की गोल्डन मम्मी रत्ना शाक्या की, जो एक पैरालिसिस पेशेंट हैं। उन्होंने कहा कि मुझे चलने और बोलने में थोड़ी सी दिक्कत होती थी। इसलिए जिम जॉइन किया और 3 साल जिम करते के ट्रेनर धर्मेंद्र दास अचानक एक दिन बोले आप को खेलने चलना है। मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया और मैं जानती भी नहीं थी, कि जिम करने से कभी खेलने का मौका मिलता है। कोच धर्मेंद्र समझाएं और हमें डिस्टिक लेवल पर खेलने लेकर आए। यहीं से शुरू हुआ खेल का सिलसिला। आज मैं प्रदेश लेवल पर 12 बार और राष्ट्रीय स्तर पर 5 बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप का खिलाब जीत चुकी हूं। दो बार प्रदेश स्तर पर स्ट्रांग वूमेन का सम्मान और ट्रॉफी-खिताब मिल चुका है।

५२ साल की संजीदा: 8 ऑपरेशन और कई बीमारियों को मात देकर १६ स्वर्ण पदक जीतीं
खंजीदा खातून की उम्र ५३ साल है। उन्होंने 8 ऑपरेशन कराएं हैं और कई बीमारियों को मात देकर पावरलिफ्टिंग में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर 16 स्वर्ण पदक और 3 बार स्ट्रॉन्ग वूमेन ऑफ छत्तीसगढ़ का खिताब अपने नाम कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने स्पाइनल ***** के ऑपरेशन के बाद 2 किलो भी वजन उठाने मना कर रखा था। लेकिन अपनी लगन और पहचान बनाने की दृढ़ इच्छाशक्ति से 210 किलो का भार उठा स्ट्रॉन्ग वूमेन का खिताब हासिल किया है। इंडियन पावर लिफ्टिंग फेडरेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में ७२ व २०५ किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक के साथ भारत की स्ट्रॉन्ग वूमेन मास्टर की ट्रॉफी जीत चुकी हैं।