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SPORTS: उम्र सिर्फ आंकड़ा है, जिंदादिली का नाम है जिंदगी, 63 साल में एथलेटिक्स में छलांग, जीते मेडल

- बंग्लादेश व श्रीलंका इंटरनेशनल कॉम्पीटिशन में जीत चुके हैं गोल्ड और सिल्वर मेडल।- दिसंबर २०२२ में वीजा नहीं मिला, इसलिए ढाका-बंग्लादेश में खेलने से चूक गए थे।

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SPORTS: उम्र सिर्फ आंकड़ा है, जिंदादिली का नाम है जिंदगी, 63 साल में एथलेटिक्स में छलांग, जीते मेडल

SPORTS: उम्र सिर्फ आंकड़ा है, जिंदादिली का नाम है जिंदगी, 63 साल में एथलेटिक्स में छलांग, जीते मेडल

बैकुंठपुर(योगेश चंद्रा)।कहते हैं, उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है, जिंदगी जिंदादिली का नाम है। यह शेर ६३ साल से झगराखांड़ मनेंद्रगढ़ निवासी खिलाड़ी ओम प्रकाश विश्वकर्मा पर बिल्कुल फिट बैठता है। जो एसइसीएल अनुबंधित स्कूल से दिसंबर २०२१ में सेवानिवृत्त फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर(पीटीआई) और नगर पंचायत झगराखांड़ में अध्यक्ष(२०१५ से पांच साल तक) निर्वाचित होकर जनसेवा भी कर चुके हैं। उम्र दराज खिलाड़ी विश्वकर्मा सितंबर २०२२ में संयुक्त भारतीय खेल फाउंडेशन द्वारा इंदौर में आयोजित नेशनल गेम्स में लंबी कूद में गोल्ड और तवा फेंक में ब्रॉज मेडल जीत चुके हैं। वहीं दिसंबर २०२२ में अंतरराष्ट्रीय गेम्स के लिए क्वालिफाइंग कर लिये थे। लेकिन वीजा नहीं मिलने के कारण ढाका-बंग्लादेश के बंग बंधु स्टेडियम में जौहर दिखाने का मौका नहीं मिल पाया।

राष्ट्रीय मास्टर एथलेटिक्स में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने की मिली है जिम्मेदारी
अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय एथलेटिक्स में लोहा मनवा चुके खिलाड़ी विश्वकर्मा को 42वीं और ४३वीं राष्ट्रीय मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी मिली है। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के 25 महिला एवं पुरुष खिलाडिय़ों ने १०-१२ फरवरी को मेदिनीपुर पश्चिम बंगाल में खेत प्रतिभा दिखाई है। जिसमें डिस्कस थ्रो सिल्वर और हैमर थ्रो में ब्रॉज मेडल जीते हैं। वहीं ४३ वीं राष्ट्रीय मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 14-18 फरवरी तक कोलकाता में प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसमें छत्तीसगढ़ के 7 खिलाड़ी भाग लेने पहुंचे हैं। फिलहाल ओमप्रकाश लंबीकूद एवं तवा फेंक में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

इंटरनेशनल लेवल पर जीते हैं मेडल
-इंडिया-बंग्लादेश कॉम्पीटिशन २०१९ में डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल।
-इंडिया-श्रीलंका कॉम्पीटिशन २०२१ में डिस्कस थ्रो में
सिल्वर मेडल।
-थाइलैंड कॉम्पीटिशन २०१९ में फोर्थ पॉजिशन, मेडल से चूक गए।

खेल और पढ़ाई की नहीं होती है कोई उम्र: विश्वकर्मा
खिलाड़ी विश्वकर्मा ने कहा कि खेल और पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है। किसी भी उम्र में आप मेहनत कर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्षेत्र का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्रवासियों के प्यार का नतीजा है, कि आज विदेशों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सफल हो रहा हूं।