
Guru Ghasidas National park
बैकुंठपुर. Tiger Reserve Area: गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व बनाने राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने और अस्तित्व में आने के बाद पार्क एरिया में प्रवेश को लेकर सख्ती बढ़ेगी। इससे सोनहत ब्लॉक के सात पंचायत के 21 गांव की 7025 जनसंख्या को सूर्यास्त से पहले ही मुख्य द्वार से पार्क एरिया (Tiger Reserve Area) में प्रवेश करना अनिवार्य होगा। इसके बाद यहां से प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। अर्थात जिन लोगों के घर पार्क एरिया में हैं उन्हें नियमों का पालन कड़ाई से करना होगा। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय उद्यान के अस्तित्व में आने के बाद यहां बसें गावों को अन्यत्र शिफ्ट किया जाएगा।
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथारिटी (एनटीसीए) गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व बनाने अप्रुअल मिल चुका है, जिसका एरिया 1440.57 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और सरगुजा के तमोर पिंगला अभयारण्य को मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाया जाएगा।
पहली बार टाइगर रिजर्व का पूरा क्षेत्रफल आया। टाइगर रिजर्व के कोर जोन में 2 हजार 49 वर्ग किलोमीटर तथा बफर जोन में 780 वर्ग किलोमीटर जंगल है। वहीं 2 हजार 829 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल टाइगर रिजर्व का हिस्सा होगा। छत्तीसगढ़ फॉरेस्ट ने वर्ष 2019 में गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें प्रस्तावित टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल नहीं था।
एनटीसीए से गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व बनाने अनुमति मिल चुकी है। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान, भारत का 53वां टाइगर रिजर्व अस्तित्व में आएगा। वर्तमान में 4 बाघ विचरण करते हैं। प्रदेश में 3 टाइगर रिजर्व अचानकमार, उदंती सीतानदी और इंद्रावती हैं।
वहीं राष्ट्रीय उद्यान एरिया के भीतर स्थित राजस्व ग्राम को शिफ्ट करने तक ग्रामीणों को सूर्यास्त से पहले अपने घर पहुंचना अनिवार्य होगा। हालांकि वनांचल के रहवासी पिछले 21 साल से गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं, लेकिन कभी-कभी नियम को शिथिल कर दिया जाता है। वहीं टाइगर रिजर्व बनने के बाद नियम में और सख्ती बरती जाएगी।
अविभाजित मध्यप्रदेश में संजय राष्ट्रीय उद्यान का था हिस्सा
गुरु घासीदास नेशनल पार्क कोरिया जिले के बैकुंठपुर सोनहत मार्ग पर पांच किलोमीटर दूर स्थित है। 2001 से पहले यह संजय गांधी नेशनल पार्क सीधी (मध्यप्रदेश) का हिस्सा था। पार्क के अंदर हसदेव नदी बहती है और गोपद नदी का उद्गम है।
वनौषधियों से घिरे पार्क में बाघ, तेंदुआ, गौर, चिंकारा, मैना सहित 35 प्रकार के वन्यप्राणी पाए जाते हैं। उद्यान क्षेत्र के भीतर राजस्व गांव में चेरवा, पांडो, गोंड़, खैरवार व अगरिया जनजाति निवासरत हैं। टाइगर रिजर्व में शामिल होने वाले तमोर पिंगला अभयारण्य का क्षेत्रफल 608 वर्ग किलोमीटर है। अंबिकापुर से 94 किलोमीटर दूर उत्तर सरगुजा वनमंडल में स्थित है।
इतने गांव व जनसंख्या
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान एरिया में आनंदपुर पंचायत में 3 गांव तथा वहां के जनसंख्या 1123 है। इसी प्रकार दसेर पंचायत में 2 गांव व जनसंख्या 385, नटवाही पंचायत में 4 गांव की जनसंख्या 1299, सिंघोर पंचायत के 3 गांवों में जनसंख्या 1319, उज्ञांव पंचायत के 3 गांव में जनसंख्या 683, अमृतपुर पंचायत के 3 गांव में जनसंख्या 643, रामगढ़ पंचायत के 4 गांवों में जनसंख्या 1573 है। इस तरह 7 पंचायत के कुल 21 गांवों की 7025 लोगों की आबादी यहां निवास करती है।
ये है नियमावली
1. राष्ट्रीय उद्यान के प्रति ऐसा व्यवहार करें कि यह अमूल्य धरोहर एवं प्राकृतिक स्थान है।
2. उद्यान के पूर्व निर्धारित मार्गों व क्षेत्रों में प्रवेश करें।
3. सूर्यास्त से पहले राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से बाहर निकलना जरूरी है।
4. उद्यान में वाहन की गति 20 किलोमीटर से अधिक नहीं रखें और हॉर्न व अन्य वाद्य यंत्र नहीं बजाएं।
5. उद्यान में विस्फोटक पदार्थ लाना प्रतिबंधित है।
6. राष्ट्रीय उद्यान में अवैध शिकार एवं चराई पूर्णत: प्रतिबंधित है।
7. उद्यान क्षेत्र में वनस्पति, वन्यप्राणी व उनके हिस्से न एकत्रित करें और न हटाएं।
8. बिना अनुमति फोटो खींचना, फिल्म बनाना व वीडियोग्राफी करना मना है।
9. शराब का सेवन, धूम्रपान करना और कचरा फैलाना मना है।
गांवों को शिफ्ट करने की शुरु होगी प्रक्रिया
नोटिफिकेशन जारी होने के बाद टाइगर रिजर्व अस्तित्व में आएगा। फिर राष्ट्रीय उद्यान के भीतर बसे गांवों को अन्यत्र शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
आर. रामाकृष्णा वाई, डायरेक्टर गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान कोरिया
Published on:
05 Apr 2022 02:15 pm

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