
सावांरावां ट्रेन हादसा: 35 साल पुराने पहिए-कलपुर्जे को देख सिहर उठते हैं बुजुर्ग, एक यात्री की 11 दिन बाद लाश मिली थी
बैकुंठपुर /सावांरावां।पटना ८४ गांव के ग्राम सावांरावां गोबरी रेलवे ब्रिज के पास बड़े रेल हादसे के बाद करीब ३५ साल से ट्रेन के पहिए सहित कलपुर्जे पड़े हुए हैं। हादसे में रेलवे स्टाफ सहित दर्जनभर से अधिक यात्रियों की दर्दनाक मौत हुई थी। रेलवे लाइन से जब-जब ट्रेन गुजरती है, गांव के बुजुर्ग हादसे को याद करते हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 1988 में सुबह करीब १०.३० बजे गोबरी रेलवे पुलिया के आसपास गोलाई में दुर्घटना हुई थी। जिसमें रेलवे स्टाफ सहित दर्जनभर से अधिक यांत्रियों की मौत हुई थी। वहीं सैकड़ों यात्री घायल हुए थे। रेस्क्यू टीम की मदद से घायलों तत्काल हॉस्पिटल भेजा गया। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर से सेवानिवृत्त कर्मचारी राम स्वरूप यादव ने पत्रिका टीम को घटना की विस्तार से जानकारी दी। जो हादसे के वक्त पटरी मेंटेनेंस कार्य कर रहे थे। उन्होंने बताया कि घटना तिथि को स्टाफ से साथ कटोरा रेलवे स्टेशन से महज 2 किलोमीटर दूरी पर पटरी मेंटनेंस का कार्य कर रहे थे। इसी बीच कटोरा रेलवे स्टेशन से एक चालक मालगाड़ी को दूसरी पटरी पर क्रॉस करने के लिए आगे बढ़ाया। इसी बीच अचानक मालगाड़ी का ब्रेक फेल हुआ और कटोरा रेलवे स्टेशन से बड़ी तेजी से बिश्रामपुर की ओर जाने लगी। वहीं बिश्रामपुर की तरफ से आ रही यात्री ट्रेन से गोबरी पुलिया के पास गोलाई में आमने-सामने टकरा गई थी।
बिलासपुर रेस्क्यू टीम ने एक यात्री का शव ट्रेन की पानी टंकी से बरामद किया था
रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी यादव ने बताया कि घटना के दिन ही बिश्रामपुर के धरतीपारा निवासी एक यात्री बिश्रामपुर रेलवे स्टेशन से कहीं जाने ट्रेन में बैठा हुआ था। एक्सीडेंट के बाद उस व्यक्ति का शव नहीं मिला था। मामले में मृतक के परिजनों ने बिलासपुर रेलवे के अधिकारियों से दावा किया। कि, हमारे परिवार का एक सदस्य को बिश्रामपुर से रेलवे स्टेशन से हमने ट्रेन में बैठाया था। जिसका कोई सुराग नहीं मिला है। दर्दनाक हासदे के 11 दिन बाद बिलासपुर रेलवे टीम के साथ अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचे थे। उस दौरान क्षतिग्रस्त ट्रेन की बोगियों को खंगालना शुरू किया, लेकिन उनके हाथ कुछ भी नहीं लगा था। फिर कुछ देर बाद अधिकारियों ने गैस कट्टर से बोगियों को काटना शुरू किया। उसी समय ट्रेन की पानी टंकी में एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ था।
इंजन के पीछे वाली बोगियों में नहीं बैठे थे यात्री, इसलिए नहीं हुई थी ज्यादा यात्रियों की मौतें
रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी यादव ने बताया कि ट्रेन इंजन के पीछे की बोगी मालवाहक बोगी थी। उसमें यात्रियों को बैठने के लिए प्रतिबंध था। इसी कारण सभी यात्री पीछे के बोगियो में बैठे हुए थे। घटना के समय पीछे की बोगी पहले ही पटरी से उतरकर नीचे खेत में गिरी थी। इसलिए यात्रियों की मौत कम हुई थी।
सावांरावां स्थित गोबरी रेलवे ब्रिज के पास बड़ा हादसा हुआ था। जिसमें रेलवे स्टाफ सहित यात्रियों की मौत हुई थी।
जेके जेना, स्टेशन मैनेजर बैकुंठपुर रोड स्टेशन, कोरिया
Published on:
15 Apr 2023 08:49 pm
बड़ी खबरें
View Allकोरीया
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
