
सावधान! कोटा में 125 मकान हैं खौफनाक, जहां से गुजरना मौत को दावत देना जैसा
कोटा। मुम्बई में पुल हादसे में चार लोगों की जान चली गई है। कोटा में जर्जर मकानों में सैकड़ों लोग जान जोखिम में डालकर रहते हैं। जबकि नगर निगम की ओर से इन मकानों को खतरनाक घोषित कर रखा है और लाल निशाल लगा रखा है। पुराने कोटा में निगम ने करीब सवा सौ मकानों को डेंजर घोषित कर रखा है।
इन घरों में लोगों को नहीं रहने के लिए नोटिस भी चस्पा कर रखे हैं, लेकिन लोग इन घरों को छोडऩा तक नहीं चाहते हैं। अनंत चतुर्दशी की शोभायात्रा से पहले नगर निगम की ओर से नोटिस चस्पा किया जाता है और डेंजर मकानों पर चेतावनी के लिए लाल निशान भी लगाया जाता है। पुराने कोटा में मकान हवेलियांनुमा बने हैं, जिनके गिरने का हमेशा अंदेशा बना रहता है। पिछले दिनों निगम के अधीक्षण अभियंता प्रेमशंकर की अगुवाई में टीम ने जर्जर मकानों का दौराकर रिपोर्ट भी तैयार की थी।
जर्जर हो चुके मकान
कोटा के पुराने शहर में पाटनपोल, कैथूनीपोल, टिपटा सहित कई इलाके ऐसे हैं, जहां जर्जर मकान खतरों को निमंत्रण दे रहे हैं। बरसात के दिनों में यह जर्जर भरभराकर गिरने की आशंका बनी रहती है। नगर पालिका की ओर से इन भवनों पर नोटिस चस्पा कर चेता चुका है, फिर भी लोग खतरे से बेखबर बने हुए हैं।
इधर, स्कूल भी जर्जर
राजकीय माध्यमिक विद्यालय नांता महल में संचालित है। महल काफी पुराना होने के कारण यहां बने कमरों के दरवाजे टूट चुके हैं। दीवारें जर्जर हो चुकी है। यहां करीब तीन सौ विद्यार्थी हैं, जो खतरे के साए में पढऩे को मजबूर हैं।
यहां भी खस्ताहाल भवन
कोटा जिले में मकड़ावद, थैरोली, देलोद, नलावता की झौपडिय़ां, ढिढोरा स्कूल जीर्णशीर्ण कमरों में चल रहे हैं।
Published on:
15 Mar 2019 07:00 am
