28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

प्रदेश में 19 नए संस्कृत काॅलेज खुलेंगे, नोडल अ​धिकारी नियुक्त किए

मुख्यमंत्री की गई बजट घोषणा 2023-24 प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बूंदी, बारां, झालावाड़, करौली, भीलवाड़ा, नागौर, टोंक, पाली, सिरोही, जालोर, जैसलमेर, बाड़मेर,चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ जिलों में संस्कृत महाविद्यालय शुरू किए जाएंगे। इससे प्रदेश के समस्त जिलों में संस्कृत महाविद्यालय स्थापित हो जाएंगे।  

2 min read
Google source verification

कोटा

image

Abhishek Gupta

Mar 19, 2023

प्रदेश में 19 नए संस्कृत काॅलेज खुलेंगे, नोडल अ​धिकारी नियुक्त किए

प्रदेश में 19 नए संस्कृत काॅलेज खुलेंगे, नोडल अ​धिकारी नियुक्त किए

कोटा. मुख्यमंत्री की गई बजट घोषणा 2023-24 प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बूंदी, बारां, झालावाड़, करौली, भीलवाड़ा, नागौर, टोंक, पाली, सिरोही, जालोर, जैसलमेर, बाड़मेर,चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ जिलों में संस्कृत महाविद्यालय शुरू किए जाएंगे। इससे प्रदेश के समस्त जिलों में संस्कृत महाविद्यालय स्थापित हो जाएंगे।

निदेशक संस्कृत शिक्षा राजस्थान भास्कर शर्मा ने इस बजट घोषणा की क्रियान्विति के लिए शुक्रवार को नोडल अधिकारियों की नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। नोडल अधिकारियों को संबंधित जिला कलक्टर व विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर महाविद्यालय स्थापना के लिए अध्ययन अध्यापन के लिए अनुकूल वातावरण व सुलभ आवागमन से युक्त कम से कम 5 एकड़ भूमि एवं अस्थाई भवन की व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया है।

संस्कृत काॅलेज कोटा के रुक्टा इकाई सचिव डाॅ. हंसराज गुप्ता ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में कम से कम एक संस्कृत महाविद्यालय संस्कृत शिक्षा के उत्तरोत्तर विकास के लिए समय की मांग थी। प्रदेश में संस्कृत शिक्षा के सैकड़ों नेट पीएचडीधारी प्रतिभावान छात्र-छात्राएं स्कूली स्तर पर अपनी सेवाएं देने पर मजबूर हैं। वहीँं इतने ही छात्र बेरोजगार हैं या अन्य प्रदेशों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश में पहले से 31 सरकारी संस्कृत काॅलेज चल रहे हैं, जहां पिछले 18 वर्षों से नवीन नियुक्तियां नहीं हुई है। इससे अब नवीन नियुक्तियों का मार्ग भी सरकार की ओर से प्रशस्त किया जाएगा।

रटलाई (झालावाड) में संस्कृत कालेज की मांग सबसे पुरानी
पूर्व संभागीय संस्कृत शिक्षा अधिकारी प्रो. संजय चावला ने बताया कि झालावाड जिले के रटलाई स्थित राजकीय आदर्श वरिष्ठ उपाध्याय (सीनियर सैकण्डरी) संस्कृत विद्यालय सबसे पुराना है। 1985 से संचालित इस विद्यालय को 1999 में वरिष्ठ उपाध्याय स्तर पर क्रमोन्नत किया गया था। इस विद्यालय को महाविद्यालय स्तर पर क्रमोन्नत करने की मांग पिछले 23 से भी अधिक वर्षों से की जा रही है। कस्बे के छात्रों को संस्कृत में शास्त्री (बीए) के लिए चेचट तथा आचार्य (पीजी) के लिए कोटा आना पड़ता था। अधिकांश बालिकाएं तो 12 वीं के बाद पढ़ाई ही छोड़ देती थी। इसी प्रकार बूंदी व बारां में भी संस्कृत काॅलेज हो जाने से वहां के वरिष्ठ उपाध्याय उत्तीर्ण छात्रों को कोटा नहीं आना पड़ेगा।