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घडिय़ाल अभयारण्य का 256 वर्ग किमी क्षेत्र अब रामगढ़ टाइगर रिजर्व का हिस्सा

खनन समेत कई गतिविधियों पर लगी रोक बाघों के लिए कॉरिडोर का करेगा काम

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घडिय़ाल अभयारण्य का 256 वर्ग किमी क्षेत्र अब रामगढ़ टाइगर रिजर्व का हिस्सा

घडिय़ाल अभयारण्य का 256 वर्ग किमी क्षेत्र अब रामगढ़ टाइगर रिजर्व का हिस्सा

जयप्रकाश सिंह

कोटा. राज्य सरकार ने कोटा और बूंदी जिले से गुजर रही चम्बल नदी के 256 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व का हिस्सा घोषित कर दिया है। इसके तहत नदी के दोनों किनारों से एक-एक किलोमीटर दूर तक का क्षेत्र क्रिटिकल टाइगर हेबीटाट [कोर] एरिया माना गया है। वर्तमान में यह हिस्सा राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य का हिस्सा है। टाइगर रिजर्व का कोर एरिया घोषित होने के बाद अब इस क्षेत्र की सीमा से एक किलोमीटर आगे तक इको सेंसेटिव जोन रहेगा, जहां खनन, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां बिना अनुमति प्रतिबंधित होंगी। यह पूरा क्षेत्र केशवरायपाटन और इटावा वन रेंज में आता है। यह हिस्सा अब रामगढ़ और मुकुन्दरा टाइगर रिजर्व के बीच बाघों के विचरण के लिए कोरिडोर का काम करेगा।


इसलिए शामिल किया

वन विभाग ने रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निर्धारण के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने पिछले दिनों टाइगर रिजर्व क्षेत्र में राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य क्षेत्र को भी शामिल कर लिया। इसके पीछे यह कारण माना गया कि पूर्व में इस क्षेत्र में बाघों का आवागमन होता रहा है। वर्ष 2007 में बाघिन टी-35 चम्बल के किनारे होते हुए ही सुल्तानपुर के जंगल में पहुंची थी। रणथम्भौर से ही बाघ टी-98 भी चम्बल के रास्ते होते हुए मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में पहुंचा था, जिसे एमटी-4 नाम दिया गया। इसके अलावा कुछ समय तक बाघ टी-110 भी चम्बल के आसपास के क्षेत्र में रहा था।

ये इलाके हैं शामिल

टाइगर रिजर्व में चम्बल का 256.28 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल किया गया है। इसमें कोटा जिले के चंद्रावला, नीमोदा हरिजी, छीपरदा, बलदेवपुरा, सुल्तानपुर, झोटोली, मण्डावरा, पीपल्दा साण्ड, नरसिंहपुरा, नोनेरा, गेंता, पाडा नीमसरा, सीनोता, ढीबरी चम्बल, पीपल्दा समेल, घघटाना को शामिल किया है। बूंदी के रोटेदा, पाली बसवाड़ा, जगदरी, गोहाटा, बलदेवपुरा, डोलर, बालोद, पीपल्दा, कोटाखुर्द, बहडावली, माखीदा और ढीकोली के इलाकों को शामिल किया है।

रुकेगा अवैध खनन

भले ही वन विभाग ने चम्बल नदी के किनारों को राष्ट्रीय घडिय़ाल अभयारण्य क्षेत्र घोषित कर रखा है, लेकिन कोटा और बूंदी जिले में चम्बल नदी से बड़ी मात्रा में बजरी का अवैध खनन चल रहा है। अब टाइगर रिजर्व घोषित होने से यहां खनन और अन्य प्रतिबंधित कार्यों पर रोक लगेगी। वहीं यहां नया इको सिस्टम विकसित होगा। चम्बल नदी को भी संरक्षण मिलेगा। यहां वानिकी गतिविधियां बढ़ेगी।


चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य क्षेत्र को टाइगर रिजर्व में शामिल करने का निर्णय सराहनीय है। इसके बनने से अब धौलपुर से लेकर कुम्भलगढ़ तक बाघों के लिए कॉरिडोर तैयार होगा। यह बाघों का सदियों पुराना वनमार्ग माना जाता रहा है। चम्बल नदी में प्रदूषण पर भी रोक लगेगी।

डॉ. सुधीर गुप्ता, सचिव ग्रीन कोर संस्था
राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य क्षेत्र अब रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व का हिस्सा हो गया है। नदी से दोनों तरफ एक-एक किलोमीटर का क्षेत्र कोर एरिया है, जहां सभी तरह की गतिविधियां प्रतिबंधित है, वहीं इससे आगे एक किलोमीटर तक का क्षेत्र इको सेंसेटिव जोन है, जिसमें खनन समेत कई गतिविधियों के लिए वन विभाग से अनुमति लेनी होगी।

संजीव शर्मा, उप वन संरक्षक और उप क्षेत्र निदेशक [कोर] रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व