
कोटा की सहकारी समितियों में लगातार खुल रहे घोटाले, अफसरों ने 32 लाख का गबन कर आपस में बांटे
कोटा. जिले की एक और ग्राम सेवा सहकारी समिति ( Village Co-operative Society ) में 32 लाख रुपए का घोटाला सामने आया है। इसमें भी घोटाले पर पर्दा डालने के लिए गलत लेखे तैयार किए गए थे, ताकि मामला सामने नहीं आए, लेकिन सहकारिता विभाग ( cooperative department ) के उच्चाधिकारियों तक शिकायत पहुंचने पर राज खुल गया। अब इस मामले की पांच बिन्दुओं पर जांच के आदेश दिए गए हैं। यह मामला है सांगोद पंचायत समिति की कुराड़ ग्राम सेवा सहकारी समिति ( Village Co-operative Society ) का है।
सहकारी समितियां कोटा के उप रजिस्ट्रार ने कुराड़ ग्राम सेवा सहकारी समिति के गबन के मामले में सहकारी अधिनियम की धारा 55 के तहत जांच के आदेश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि समिति के वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 के लेखों में अनियमितता बरती जाकर गबन, दुरुपयोग का प्रकरण संज्ञान में लाया गया है। अत: दोनों वर्षों की वसूली की रसीदों एवं रोकड़ बही से तैयार किए गए लेखा के अंतर की जांच, वर्ष 2014-15 और 2015-16 में फसल बीमे की राशि में जमा खर्च, मिनी बैंक के खातों का सत्यापन एवं जमाओं की जांच, समिति के रेकॉर्ड एवं तैयार लेखों मेंअंतर डालकर गलत लेखों का अभिप्रमाणन कर गबन को छिपाने में सहयेाग करने पर ऑडिटर की भूमिका की जांच के आदेश दिए गए हैं। गलत लेखे तैयार कर 32 लाख से अधिक का गबन छिपाया गया है।
जांच का जिम्मा कोटा केन्द्रीय सहकारी बैंक की अधिशासी अधिकारी पिंकी बैरवा को सौंपा गया है। जांच अधिकारी को दोषी कर्मचारी, पदाधिकारियों के विरुद्ध स्पष्ट वित्तीय एवं प्रशासनिक उत्तरदायित्वों का निर्धारण कर जांच प्रतिवेदन एक माह में भेजने को कहा है।
समिति के संचालक मण्डल की पिछलों दिनों हुई आम सभा में गलत लेखे तैयार कर गबन पर पर्दा डालने के मामले में नए सिरे से लेखे तैयार करने का प्रस्ताव लिया है। इस समिति के लेखे भी सीए राजेश सी. जैन ने ही किए थे। समिति की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014-15 के अंकेक्षित आय-व्यय में ऋण वसूली तीन करोड़ 76 लाख 16 हजार 9089 रुपए है, जबकि रसीदों का रोकड़ बही से मिलान करने पर ऋण वसूली तीन करोड़ 92 लाख 82 हजार 596 रुपए आती है।
बीमा क्लेम की राशि 11 नवम्बर 2014 को 33 लाख 62 हजार 551 रोकड़ बही में इन्द्राज है, लेकिन आय-व्यय में अंकित नहीं कर रखा है। इसी तरह वर्ष 2015-16 में अंकेक्षित आय-व्यय में ऋण वूसली राशि तीन करोड़ 55 लाख 35 हजार 127 रुए है, जबकि रोकड़ बही से मिलान करने पर रसीदों द्वारा तीन करोड़ 71 लाख 36 हजार 322 रुपए किसानों द्वारा सीधे बैंक में जमा सही बैठती है। इस राशि में भारी अंतर आ रहा है। समिति के व्यवस्थापक सूरजमल यादव ने उप रजिस्ट्रार को आम सभा का प्रस्ताव अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजा था। इसमें लिखा कि वर्ष 2014-15 और 2015-16 के ऑडिट एवं लेखा पुस्ताकों में भारी अंतर पाया गया है। इसलिए प्रकरण भेजा गया है।
अजयसिंह पंवार, उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां कोटा
Published on:
10 May 2019 11:22 am
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