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राजस्थान के इस 550 पुराने मंदिर का होगा जीर्णोद्धार, पर्यटन के साथ बढ़ेगा रोजगार, जानें क्या है इसकी खासियत

Kota News : राज्य सरकार की ओर से कोटा के पाटनपोल स्थित श्रीबड़े मथुराधीश मन्दिर पर विकास कार्य कराने की राह खुल गई हैं। राजस्थान पत्रिका ने चंबल रिवर फ्रंट से आस्था कॉरिडोर बनाकर श्रीमथुराधीशजी मंदिर को जोड़ने की पहल की थी।

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कोटा

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Kirti Verma

Jul 02, 2024

Kota News : राज्य सरकार की ओर से कोटा के पाटनपोल स्थित श्रीबड़े मथुराधीश मन्दिर पर विकास कार्य कराने की राह खुल गई हैं। राजस्थान पत्रिका ने चंबल रिवर फ्रंट से आस्था कॉरिडोर बनाकर श्रीमथुराधीशजी मंदिर को जोड़ने की पहल की थी। मंदिर समिति और पर्यटन विभाग में इसे लेकर सहमति बन गई है। गौरतलब है श्रीमथुराधीश मंदिर 550 साल पुराना है। विधानसभा में लेखानुदान 2024-25 में प्रदेश के 20 मंदिरों में 300 करोड़ रुपए राशि से विकास कार्य कराने की घोषणा की गई थी।

इस सूची में श्रीबड़े मथुराधीश मंदिर को भी शामिल किया गया है और जनसुविधा के विकास कार्य होने प्रस्तावित है। देश में वल्लभ संप्रदाय की सप्तपीठ में से प्रथम पीठ कोटा में श्रीमथुराधीश मंदिर के रूप में मौजूद है। यदि काशी विश्वनाथ की तर्ज पर नंदग्राम को रिवर फ्रंट से जोड़ा जाए तो हाड़ौती में धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं बढ़ सकती है। मंदिर के विकास से पर्यटन के साथ रोजगार भी बढ़ेगा।

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आधारभूत ढांचा हो विकसित तो बढ़ें श्रद्धालु
नाथद्वारा में श्रीनाथजी के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं। वे सभी प्रथम पीठ के दर्शन करने के लिए कोटा आना चाहते हैं, लेकिन आधारभूत ढांचा विकसित नहीं होने के कारण नहीं आ पाते।

रिवर फ्रंट से महज 5 मिनट की दूरी
श्रीमथुराधीश मंदिर की रिवर फ्रंट से पैदल दूरी केवल 5 मिनट की है। मंदिर के पीछे का कॉरिडोर रिवर फ्रंट को छूता है। यहां बृजेश्वरजी के मन्दिर पर पार्किंग का निर्माण कराया जा सकता है। यहीं पर श्रीविठ्ठलनाथजी की पाठशाला है। जहां पर धर्मशाला का निर्माण हो सकता है। अभी मंदिर के पास केवल 100-200 दर्शनार्थियों के लायक ढांचा विकसित है। इसे 1000 दर्शनार्थी, भक्त और पर्यटकों के हिसाब से विकसित किए जाने की आवश्यकता है।

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