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कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल और जेके लोन अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल्योर के मामले में एम्स दिल्ली और जोधपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सात सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी शनिवार को कोटा पहुंची। कमेटी ने दोनों अस्पतालों का दौराकर प्रसूताओं की मौत के कारणों की तह तक जाने की कोशिश की। टीम ने प्रसूताओं, परिजनों, इलाज करने वाले डॉक्टरों समेत संबंधित सभी कार्मिकों से बात की। कमेटी ने प्रसूताओं की मेडिकल हिस्ट्री, दवाएं और ड्यूटी रजिस्टर का भी पता किया। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को देगी।
प्रसूताओं की मौत के संवेदनशील मामले को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एम्स की उच्च स्तरीय कमेटी कोटा भेजने की बात कही थी। बिरला ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से चर्चा की थी। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर हाई लेवल जांच कमेटी बनाई गई।
कमेटी ने हर पहलू को देखा
जांच कमेटी की अध्यक्षता एम्स दिल्ली की गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. रीता माहे ने की। टीम में पीएसएम, हॉस्पिटल मैनेजमेंट, गायनोकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, एनेस्थीसिया, पीडियाट्रिक्स विभाग के विशेषज्ञ शामिल रहे। कमेटी ने जेके लोन और नए अस्पताल में छह घंटों तक निरीक्षण किया। इस दौरान भर्ती मरीजों का रेकॉर्ड, मृत प्रसूताओं के उपचार संबंधी दस्तावेज, नर्सिंग केयर, ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मरीजों की एंट्री से लेकर डिस्चार्ज तक की पूरी प्रक्रिया और उपचार में लगे समय का भी अध्ययन किया। कमेटी ने उपचार में शामिल डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से पूछताछ कर घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली।
मौत और गंभीर बीमारियों के कारण तलाशने में जुटी कमेटी
जेके लोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि कमेटी प्रसूताओं की मौत और गंभीर बीमार होने के कारणों की गहन जांच कर रही है। नर्सिंग रेकॉर्ड, मेडिकल इन्वेस्टिगेशन और मरीजों को हैंडल करने की प्रक्रिया का बारीकी से परीक्षण किया गया। इसके अलावा स्वस्थ होकर लौटे मरीजों के मामलों की भी जानकारी जुटाई। कमेटी में हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के डॉ. रंजन सिंह, पीडियाट्रिक्स के डॉ. अंकित वर्मा, एनेस्थीसिया के डॉ. दालिम सिंह, माइक्रोबायोलॉजी के डॉ. गगनदीप सिंह और एम्स जोधपुर की गाइनोकोलॉजिस्ट डॉ. मनीषा झीरवाल शामिल थी।
रैंप का फोटो लिया, पूछा प्रसूताओं की डिलीवरी कहां कराई जाती है
कमेटी ने दोपहर करीब 3.30 बजे पोस्ट गायनिक प्रथम, द्वितीय और इमरजेंसी वार्ड के हालात देखे। निरीक्षण के दौरान गायनिक सैकंड वार्ड के सामने बने रैंप का फोटो भी लिया। इसके बाद नर्सिंग इंचार्ज से वार्ड संचालन और व्यवस्थाओं को लेकर जानकारी ली। जांच कमेटी ने नर्सिंग स्टाफ से पूछा कि प्रसूताओं की डिलीवरी कहां कराई जाती है, डिलीवरी के बाद मरीजों को कहां शिफ्ट किया जाता है। मरीजों को कैसे हैंडल किया जाता है। बेड पर लगे मॉनिटरिंग सिस्टम के उपयोग और मरीजों की निगरानी प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी ली। वार्डों की दीवारों, कोनों और सफाई व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया।
रिकॉर्ड और स्टोर व्यवस्था की जांच
गायनिक प्रथम और द्वितीय वार्ड में प्रसूताओं के उपचार और डिलीवरी रिकॉर्ड की जांच की गई। इस दौरान वार्ड में मौजूद व्यवस्थाओं को देखकर कमेटी ने संतोषजनक और व्यवस्थित स्थिति पर भी ध्यान दिया। हालांकि गायनिक प्रथम के सामने कुछ पुराने स्ट्रेचर छिपाकर रखे मिले, जिन्हें लेकर भी टीम ने जानकारी ली।
इमरजेंसी और सुपरस्पेशलिटी का निरीक्षण
इसके बाद कमेटी इमरजेंसी वार्ड में पहुंची और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में शाम 4 बजे प्रसूताओं के परिजनों से बातचीत की और मरीजों की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही, नेफ्रोलॉजी विभाग के आइसीयू में जाकर इलाज प्रक्रिया और गंभीर मरीजों की देखभाल के तरीकों को भी समझा।
एम्स की कमेटी को सभी अस्पतालों का निरीक्षण करवा दिया है। उन्होंने सभी प्रसूताओं का डेटा कलेक्ट किया है। परिजनों, चिकित्सकों व स्टाफ से बात की है। कमेटी दो-तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।
- डॉ. निलेश जैन, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज
Published on:
16 May 2026 07:41 pm
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