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OMG: खून की प्यासी हैं यह सड़कें, हर महीने इतने लोगों का बहता है खून, जानकर आपका भी दिल दहल जाएगा

शहर में हर माह औसतन 7 लोगों की हादसों में अकाल मौत हो रही है। वहीं औसतन हर माह 42 हादसों में 39 लोग घायल हो रहे।

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कोटा

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Zuber Khan

Oct 20, 2017

Blood on the Road

कोटा की सड़कों पर हर माह होते हैं 42 एक्सीडेंट

कोटा . शहर में हर माह औसतन 7 लोगों की हादसों में अकाल मौत हो रही है। वहीं औसतन हर माह 42 हादसों में 39 लोग घायल हो रहे। मौत के झपट्टे का औसत पिछले सालों में प्रति माह 8 और 9 था। दिलासे की बात सिर्फ यह कि पिछले दो साल की तुलना में इस साल अब तक दो सौ हादसे कम हुए, बीस मौतें भी कम हुई। लेकिन, इन तीनों साल के आंकड़े बताते हैं कि हादसे एनएच पर ज्यादा हो रहे।

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चौंकाने वाली बात यह भी कि दिन के उजाले में ही वाहन ज्यादा भिड़ रहे। इधर, हैंगिंग ब्रिज चालू होने पर भारी वाहनों का शहर में आना बंद होने से हादसों में कमी आई है। 30 अगस्त से हैंगिंग ब्रिज से नियमित यातायात शुरू होने के बाद से सुबह 6 से रात 11 बजे तक भारी वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा।


हल्के वाहनों से ज्यादा
शहर में ज्यादा हादसे कार व जीप से हुए। यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार 2015 में जनवरी से सितम्बर तक बस ट्रक से जहां 112 हादसे हुए थे, वहीं कार जीप से 187 हादसे हुए थे। साल 2016 में बस-ट्रक से 88 हादसे और कार-जीप से 156 और 2017 में अब तक बस ट्रक से 75 हादसे हुए तो कार जीप से 121 हादसे हुए हैं।

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सुबह 6 से रात 11तक नो एंट्री लागू
शहर में घनी आबादी वाले क्षेत्र और चिह्नित जगहों पर नो एंट्री लागू है। सुबह 6 से रात 11 बजे तक भारी वाहनों की आवाजाही व प्रवेश पर रोक है।

दिन में होती है ज्यादा मौतें
साल 2015 में दिन में 366 हादसे हुए थे वहीं रात में 213
साल 2016 में दिन के समय 305 की तुलना में रात में 162
साल 2017 में अब तक दिन के समय 230 व रात में 149 हादसे हुए हैं।

यातायात पुलिस के उप अधीक्षक श्योराजमल मीणा ने बताया कि अभी भी जो कमियां हैं उन्हें भी शीघ्र सुधारेंगे। नियम उल्लंघन करने वालों पर कार्यवाही की जाएग़्ाी। पूरा फोकस सड़क सुरक्षा पर है।