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दुनियादारी की समझ सिखाते डाक टिकट

76 वर्षीय इसरानी के पास 208 देशों के 31 हजार डाक टिकटों का संग्रह

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दुनियादारी की समझ सिखाते डाक टिकट


कोटा. ब्रेस्ट फीडिंग के फोटो सार्वजनिक होने के बाद भले ही आस्ट्रेलिया की सांसद लैरीज से लेकर भारतीय अभिनेत्री गिलू जोजेफ आलोचनाओं के शिकार हो चुकी हों, लेकिन आप जानकर हैरत में पड़ जाएंगे कि 47 साल पहले मध्य अमेरिकी देश निकारागुआ ने ब्रेस्ट फीडिंग कराती महिला का बकायादा डाक टिकट जारी किया था। 76 साल के जवाहर इसरानी द्वारा संग्रहित डाक टिकटों से ऐसे ही तमाम जानकारियां मिलती है।
एक जापानी कंपनी में निरीक्षण अभियंता के तौर पर काम कर रहे इसरानी पूरे देश में घूम-घूम कर बच्चों को इन डाक टिकटों के जरिए दुनियादारी समझाने की कोशिश कर रहे हैं। मल्टी मेटल्स से जुड़े एक निरीक्षण को कोटा आए इसरानी ने बताया कि करीब 66 साल पहले दिल्ली के लोधी रोड स्थित सिंधी स्कूल की कक्षा पांच में था। उनके शिक्षक डॉ. मोतीलाल जोतवानी ने एक दिन सभी बच्चे को अपनी रुचि की चीज को सहेजने का सबक दिया। उसी दिन से उन्होंने इसके संग्रह को अपना ध्येय बना लिया। 66 साल सफर में उन्होंने 208 देशों की 31,272 डाक टिकटों का संग्रह कर लिया।

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उनके संग्रह में वर्ष 1895 से 2018 तक के 31 हजार से ज्यादा डाक टिकट हैं। इन टिकटों के जरिए वे बच्चों को देश और दुनिया के बारे में जानकारी देते हैं। पूरे संग्रह को उन्होंने अलग-अलग थीमों जैसे पशु-पक्षी, पेटिंग, झंडे, ऐतिहासिक इमारतें, वाहनों, पेड़ पौधे, राष्ट्राध्यक्ष, कवि, लेखक, खेल-कूद, म्यूजिक, सिनेमा, स्वतंत्रता सेनानी, कार्टून के अलावा देशों के हिसाब से रखा गया है।


सबूतों के साथ अनूठा सबक

इसरानी बच्चों की पसंद के मुताबिक अपने कलेक्शन से डाक टिकट दिखाना शुरू करते हैं। क्लासिकल डांस के बारे में जानकारी देने के लिए 52 टिकटों का संग्रह दिखाते हैं। फूलों की जानकारी के लिए 460, खेलों के लिए 1816 और सेनाओं के बारे में जानकारी देने को 120 से ज्यादा टिकट उनके पास हैं। जापान के निप्पो कार्टून पर जारी गए गोल, मंगोलिया के ट्रेक्टरों पर जारी किए बर्फी नुमा और यमन के करीब दो इंच लंबे डाक टिकट मौजूद हैं।