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खुलासा: कोटावासियों की सांसों में जहर घोल रहा थर्मल पावर प्लांट, गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे लोग

कोटा थर्मल पावर प्लांट कोटावासियों की सांसों में जहर घोल रहा है। इसका खुलासा राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में हुआ है।

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कोटा

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Zuber Khan

May 14, 2018

kota news

कोटा . कोटावासियों की सांसों में जहर घोल रहे कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट प्रबंधन ने तीन साल में खामियों को दुरुस्त करने की बजाय वायु प्रदूषण की जांच के लिए लगाए गए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम को ही खराब कर दिया। नतीजतन थर्मल की चिमनियों के जहरीला धुआं उगलने पर भी हालात सामान्य दिखाई देते रहे, लेकिन राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जब मैनुअल मॉनीटरिंग की तो पूरी पोल खुल गई।

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कोटा थर्मल को पर्यावरण सहमति मिलने तक बंद करने की सिफारिश करने के साथ ही कैग की जांच में खुलासा हुआ कि पर्यावरण सहमति हासिल करने के लिए थर्मल प्रबंधन वायु प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनीटरिंग तक को छेडऩे से बाज नहीं आया। धुएं के साथ राख के कणों को चिमनियों से बाहर जाने से रोकने के लिए थर्मल ने इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रीसीपीटेटर्स (ईपीएस) तो लगाए थे, लेकिन किसी भी यूनिट में यह काम नहीं कर रहे थे।

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चिमनियां जमकर धुआं और राख बाहर फेंक रही थी, बावजूद इसके ऑनलाइन पॉल्यूशन मॉनीटरिंग में प्रदूषण का स्तर सामान्य से भी कम आ रहा था। आरएसपीसी के कोटा क्षेत्रीय कार्यालय ने जब प्रदूषण की मैनुअल जांच की तो खतरनाक स्तर पर मिला। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि केएसटीपीएस के इंजीनियरों ने ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम को ही खराब कर दिया।

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दावों तक ही सिमटे अफसर
थर्मल की खामियां दूर करने के लिए अफसरों ने हर बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आश्वासन दिया, लेकिन जब भी एक्शन प्लान मांगा गया, अधिकारी पीछे हट गए। तीन साल में तीन बार प्रदूषण नियंत्रण संयत्रों को चालू करने का दावा किया गया, लेकिन तीनों बार स्थलीय जांच में झूठ साबित हुआ। तीन साल पहले हुई जांच के दौरान आरएसपीसीबी को जो स्थिति मिली वही हर बार के सत्यापन में सामने आई। इसके लिए कैग ने थर्मल की बदहाली के लिए आला अफसरों को जिम्मेदार माना है।

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हालात बेहद गंभीर
जांच में खुलासा हुआ कि थर्मल प्रबंधन ने सीवेज और औद्योगिक कचरे के निस्तारण के लिए कोई इंतजाम नहीं किए। ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के निर्देश दिए गए, लेकिन प्रबंधन ने इसका जवाब तक नहीं दिया। थर्मल परिसर में फ्लाईएश और कोयले की वजह से होने वाले प्रदूषण को रोकने का भी कोई इंतजाम नहीं है। कोयले की बारीक राख को उडऩे से रोकने के लिए प्लो फीडर के ऊपर पानी का छिड़काव करने के लिए वाटर नोजल तक पिछले 8 साल से बंद पड़े थे।