
फाइल फोटो: पत्रिका
रावतभाटा। केंद्र सरकार ने नई अफीम नीति की घोषणा कर दी। पिछले साल जिन किसानों ने सीपीएस तरीके से अफीम की खेती की थी। उनमें से जिन किसानों ने 90 किलो प्रति 10 आरी के माने से डोडा विभाग को जमा कराया था उनकी बल्ले बल्ले हो गई। ऐसे किसानों को सीपीएस की बजाय परम्परागत (चीरा लगाकर अफीम निकालने) खेती करने का पट्टा (लाइसेंस) दिया जाएग।
केंद्र सरकार ने नई अफीम नीति वर्ष 2025-26 घोषित कर दी है। नई अफीम नीति से किसानों को राहत मिली है। जो किसान सीपीएस पद्धति से खेती कर रहे थे उनमें से एक बड़े किसान वर्ग के लिए नई अफीम नीति दीपोत्सव के समान रही है। पिछले साल जिन किसानों ने विभाग को 10 आरी के पट्टे में से 90 किलोग्राम तक डोडा चूरा तुलवाया था उन्हें इस बार छप्पर फाड़ इनाम मिला है। ऐसे किसानों को सीपीएस की बजाय परपरागत खेती करने के लाइसेंस की पात्रता मिल गई है। पिछले साल 67.50 किलोग्राम प्रति 10 आरी के मान से किसानों को नारकोटिक्स विभाग को डोडा जमा कराना था। जिन्होंने इससे कम जमा कराया था उनके एक साल के लिए पट्टे होल्ड कर दिए गए थे।
इस साल यह मात्र बढ़ाकर 80 किलोग्राम प्रति 10 आरी कर दिया गया है। आशय यह कि 80 किलोग्राम से कम डोडा (सीपीएस पद्धति से) विभाग को जमा कराने वाले किसानों के नई नीति में आगामी अफीम फसल सत्र के लिए लाइसेंस होल्ड कर दिए जाएंगे।
ऐसे किसान जो वर्ष 2023-24 प्रति 10 आरी 67.50 किलोग्राम से कम पोस्ता भूसा की उपज देने के कारण फसल वर्ष 2024-25 के लिए निलंबित किए गए थे उन किसानों को राहत प्रदान करते हुए इस वर्ष अफीम खेती करने के लिए पात्रता दी गई है। वर्ष 1995-96 के बाद के वे सभी अफीम किसान जो पिछले वर्ष की नीतियों में अफीम लाइसेंस के लिए पात्र थे परंतु किसी कारण से लाइसेंस जारी नहीं हुए या फिर अफीम खेती नहीं कर पाए ऐसे सभी किसान और उनके वैध वारिस लाइसेंस के लिए पात्र होंगे।
सांसद सीपी जोशी और विधायक सुरेश धाकड़ ने अफीम नीति को किसान हितेषी बताया और कहा कि इस पॉलिसी में हजारों नए किसानों को लाइसेंस मिल सकेंगे।
Published on:
15 Sept 2025 05:28 pm
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