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गाजे-बाजे से निकाली बकरे की शवयात्रा

20 साल पहले किसी की मन्नत पूरी हुई थी तो इसकी बली न देकर इसे मंदिर में भेंट कर दिया था।

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गाजे-बाजे से निकाली बकरे की शवयात्रा

कोटा. यह शहर शिक्षा नगरी होने के साथ अजब गजब किस्सों का भी शहर है। उदाहरण देखिए रविवार को अमरा की मौत हो गई तो क्षेत्र के लोगों ने गाजे बाजे के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाल दी। अमरा और कोई नहीं, एक मंदिर में भेंट किया गया एक बकरा था। इसे पशु प्रेम कहेंगे या आस्था नाम देंगे जो भी हो क्षेत्र के लोगों ने अमरा की शवयात्रा निकाल कर उसे दफना दिया। अमरा की अंतिम यात्रा भैरुजी के चौक से प्रारंभ हुई।

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जानकारी में आया कि यहां एक भैरुजी का मंदिर है। 20 साल पहले किसी की मन्नत पूरी हुई थी तो इसकी बली न देकर इसे मंदिर में भेंट कर दिया था। तब यह दो साल का था। लोइ इस बकरे को प्यार से अमरा कहकर पुकारने लगे थे। कुछ दिन पहले बकरा अस्वस्थ हो गया। इसका उपचार भी करवाया गया, कोई फायदा नहीं हुआ और इसकी मौत हो गई। इस पर लोगों ने अमरा की शवयात्रा निकाल कर दफना दिया और समाधी बनाई । जानकारी के अनुसार इसकी समाधि भी बनाई गई।

शव यात्रा में स्थानीय निवासी रवि लोटिया, रामू गुर्जर, मांगीलाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।