
BIG News: अब कोटा तैयार करेगा परमाणु वैज्ञानिक, राजस्थान की पहली यूनिवर्सिटी बनेगी आरटीयू
कोटा. राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनएसटी) में बीटेक कराने वाली राजस्थान की पहली सरकारी यूनिवर्सिटी बनने जा रहा है। बुधवार को विवि प्रशासन, परमाणु ऊर्जा वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों की उच्च स्तरीय बैठक के बाद बीटेक और एमटेक पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला हुआ। दोनों पाठ्यक्रमों का सिलेबस और सीटें तय करने के लिए जल्द ही बोर्ड ऑफ स्टडीज भी गठित कर दी जाएगी।
27 सितम्बर 2018 को आरटीयू के आठवें दीक्षांत समारोह में दीक्षा देते हुए कुलाधिपति कल्याण सिंह ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए विवि में इस बाबत पढ़ाई शुरू करने के निर्देश दिए थे। राज्यपाल के निर्देशों की प्रासंगिकता तय करने के लिए विवि प्रशासन ने अक्टूबर 2018 में परमाणु ऊर्जा वैज्ञानिकों के साथ बैठक की, लेकिन इसमें कोई ठोस नतीजे नहीं निकल सके।
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मंथन से निकला अमृत
न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के पाठ्यक्रमों का स्वरूप, सिलेबस और उपयोगिता तय करने के लिए आरटीयू ने बुधवार को देश के नामचीन परमाणु ऊर्जा वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विवि प्रशासन और प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रतिनिधियों के साथ आखिरी दौर का मंथन किया। निजी कॉलेजों के प्रतिनिधियों और विवि के शिक्षकों ने पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाली फैकल्टी, अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशाला और छात्रों को प्रेक्टिकल ट्रेनिंग उपलब्ध न होने पर चिंता जताई।
जिस पर नेशनल पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पूर्व साइट डायरेक्टर सीपी झाम ने राजस्थान एटोमिक पावर प्लांट (आरएपीपी) रावतभाटा से सेवानिवृत्त हुए सीनियर एटोमिक इंजीनियर्स को विवि फैकल्टी बनाने का, आरएपीपी के ट्रेनिंग सुपरीटेंडेंट सुनील कुमार ने प्रेक्टिकल ट्रेनिंग के लिए प्लांट के साथ विवि का एमओयू करने और आईआईटी मुम्बई के प्रो. सुनीत सिंह ने एटोमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के मार्गदर्शन में प्रयोगशाला स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। तीनों प्रस्तावों पर सभी पक्षों के बीच सहमति बन गई।
एक साथ शुरू होगा यूजी, पीजी
आरटीयू के अधिकांश शिक्षक न्यूक्लियर साइंस में एमटेक पाठ्यक्रम शुरू करने के पक्ष में थे, लेकिन जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रो. अमिताव गुप्ता ने कहा कि जब तक बीटेक पाठ्यक्रम शुरू नहीं होगा तब तक एमटेक में पर्याप्त छात्र और स्कोप क्रिएट नहीं होगा। तीनों एक्टर्नल एक्सपर्ट ने भी उनकी बात का समर्थन किया। करीब एक घंटे तक गहन मंथन के बाद एमटेक के साथ बीटेक भी शुरू करने पर सहमति बन गई। साथ ही दोनों पाठ्यक्रमों की सीटें और सिलेबस तय करने के लिए न्यूक्लियर साइंस एंट टेक्नोलॉजी विषय की स्वतंत्र बोर्ड ऑफ स्टडीज (बीओएस) गठित करने का निर्णय भी लिया गया।
बीओएस एमटेक पाठ्यक्रम चला रहे निजी एवं सरकारी और बीटेक पाठ्यक्रम संचालित कर रहे निजी विश्वविद्यालयों का दौरा करेगी। वहां के छात्रों, शिक्षकों और प्रशासन का फीडबैक ले सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर खामियों का निस्तारण भी किया जाएगा। इस दौरान कार्यवाहक कुलपति प्रो. नीलिमा सिंह, रजिस्ट्रार सुनीता डागा, प्रो. एनपी कौशिक, प्रो. एके द्विवेदी, प्रो. बीपी सुनेजा, प्रो. संजीव मिश्रा, प्रो. विवेक पांण्डेय, प्रो. एससी जैन और दिवाकर जोशी आदि शिक्षकों एवं अधिकारियों के साथ-साथ संबद्ध कॉलेजों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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करना होगा एक साल का इंतजार
न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी विषय में एमटेक और बीटेक पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया गया है। बड़ी चुनौती यह है कि न्यूक्लियर साइंस में आरटीयू देश की इकलौती सरकारी यूनिवर्सिटी होगी, जो बीटेक पाठ्यक्रम संचालित करेगी। इसलिए सभी पहलुओं को गंभीरता से परखा जाएगा। इसके बाद बीओएस को पाठ्यक्रम और सीटें निर्धारित करने के साथ-साथ संबद्ध कॉलेजों को पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए नियम बनाने, उन्हें बोम से पास कराने और फेकल्टी एवं लैब का अरेंजमेंट भी करना होगा। इस सब में करीब सालभर का वक्त लग जाएगा। इसीलिए बैठक में इस बार की बजाय अगले शैक्षणिक सत्र से दोनों पाठ्यक्रम संचालित करने का निर्णय लिया गया है।
- प्रो. बीपी सुनेजा, डीन एफओईए एवं बैठक समन्वयक
Updated on:
14 Mar 2019 01:26 am
Published on:
14 Mar 2019 07:00 am
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