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Rajasthan News : 40,000 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियोज़ का ज़खीरा! जानें ‘मास्टर माइंड’ मनीष उर्फ़ मोइन की Inside Story

कोटा में टेलीग्राम और स्नैपचैट के जरिए ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का भंडाफोड़। आरोपी मनीष शर्मा गिरफ्तार। साइबर फॉरेंसिक टीम कर रही है डिजिटल डेटा की जांच।
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कोटा

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Nakul Devarshi

Jun 27, 2026

Kota Telegram Grooming Network Manish Sharma Case Update 2026

गिरफ्तार मनीष शर्मा उर्फ मोइन खान (फोटो: पत्रिका)

राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा से महिलाओं और लड़कियों को डिजिटल जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करने वाले एक बेहद चौंकाने वाले मामले का खुलासा हुआ है। कोटा शहर की विज्ञान नगर थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर उसके पास से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज जब्त किए हैं। आरोप है कि आरोपी के फोन और विभिन्न टेलीग्राम चैट्स के माध्यम से हिंदू महिलाओं और लड़कियों के 40,000 से ज्यादा आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो व फाइलें जुड़ी हुई थीं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब स्थानीय संगठनों द्वारा पुलिस थाने में एक लिखित शिकायत दी गई। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कोटा पुलिस की साइबर और फॉरेंसिक टीमें डिजिटल सबूतों को इकट्ठा करने में जुट गई हैं।

जानिए कोटा केस की पूरी टाइमलाइन

इस पूरे संवेदनशील मामले से जुड़ी मुख्य तारीखें और कानूनी कार्रवाई की प्रशासनिक टाइमलाइन इस प्रकार है:

15 जून 2026: बजरंग दल के कार्यकर्ता योगेश ने कोटा के विज्ञान नगर पुलिस स्टेशन में मामले से जुड़े संदिग्ध सोशल मीडिया ग्रुप्स और डिजिटल चैट्स के स्क्रीनशॉट्स के साथ एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

15-16 जून 2026: शिकायत मिलते ही कोटा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की और मुख्य आरोपी मनीष शर्मा को तुरंत हिरासत में ले लिया।

25-26 जून 2026: फॉरेंसिक जांच के शुरुआती निष्कर्ष और सोशल मीडिया ग्रुप्स की डिटेल्स सामने आने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

पहचान छिपाकर ग्रुप चलाने और ब्लैकमेलिंग का दावा

विज्ञान नगर थाने में दी गई शिकायत के अनुसार, बजरंग दल के पदाधिकारियों ने दावा किया है कि कोटा शहर के भीतर सोशल मीडिया पर एक बहुत बड़ा संगठित रैकेट सक्रिय था।

शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप हैं:

पहचान छिपाने का आरोप: आरोपी की वास्तविक पहचान मनीष शर्मा के रूप में हुई है, लेकिन वह टेलीग्राम (Telegram), स्नैपचैट (Snapchat) और डिस्कॉर्ड (Discord) जैसे मोबाइल ऐप्स पर अपनी पहचान बदलकर "मोईन खान" नाम से एक्टिव था और प्रोफाइल संचालित कर रहा था।

40,000+ आपत्तिजनक फाइलों का दावा: संगठन का आरोप है कि आरोपी के फोन और विभिन्न टेलीग्राम चैट्स के माध्यम से हिंदू महिलाओं और लड़कियों के 40,000 से ज्यादा आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो व फाइलें जुड़ी हुई थीं।

ग्रूमिंग और धर्मांतरण का एंगल: आरोप लगाया गया कि टेलीग्राम पर विशेष ग्रुप्स बनाकर महिलाओं को पहले बातचीत के जरिए जाल में फंसाया जाता था, फिर उनके निजी वीडियो रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था और कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया जाता था। संगठन ने मामले में पाकिस्तान कनेक्शन का भी संदेह जताते हुए केंद्रीय एजेंसियों CBI/NIA से जांच की मांग की है।

    कोटा पुलिस की जांच, क्या मिला और क्या नहीं?

    इस संवेदनशील मामले पर फैले तनाव को देखते हुए कोटा शहर के एडिशनल सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) सुभाष मिश्रा और स्थानीय जांच टीम ने आधिकारिक तौर पर प्रगति रिपोर्ट साझा की है।

    आपत्तिजनक डिजिटल कंटेंट की पुष्टि हुई

    कोटा पुलिस ने तकनीकी जांच के बाद इस बात की विधिक पुष्टि की है कि आरोपी मनीष शर्मा टेलीग्राम ग्रुप्स और अन्य सोशल मीडिया चैनल्स के जरिए बड़े पैमाने पर आपत्तिजनक, अश्लील और अनैतिक कंटेंट शेयर करने व डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन के काम में शामिल था। उसके पास से बरामद मोबाइल और लैपटॉप को पूरी तरह सील कर दिया गया है।

    इन दावों पर अभी तक नहीं मिले सबूत

    एएसपी सुभाष मिश्रा के अनुसार, पुलिस की अब तक की प्राथमिक पूछताछ, बैंक खातों के ट्रांजैक्शन और टेक्निकल इनवेस्टिगेशन में जबरन धर्म परिवर्तन (कन्वर्जन), खतना कराने या किसी भी तरह के पाकिस्तान लिंक से जुड़े होने के कोई पुख्ता और विधिक सबूत फिलहाल नहीं हुए हैं। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी अप्रामाणिक अफवाह पर ध्यान न दें।

    डिलीटेड डेटा की रिकवरी पर टिकी है जांच

    नारायण विहार और कोटा साइबर सेल की टीमें संयुक्त रूप से इस मामले के हर एक डिजिटल फुटप्रिंट को ट्रैक कर रही हैं। आरोपी मनीष शर्मा ने गिरफ्तारी की भनक लगते ही अपने फोन से कई टेलीग्राम ग्रुप्स, चैट हिस्ट्री और क्लाउड स्टोरेज की फाइलों को डिलीट कर दिया था।

    वर्तमान में कोटा पुलिस की साइबर फॉरेंसिक टीम अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर की मदद से आरोपी के मोबाइल और लैपटॉप के डिलीटेड डेटा को रिकवर करने का प्रयास कर रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक लैब से अंतिम तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही वीडियो की सटीक संख्या, पीड़ित महिलाओं की वास्तविक पहचान और इस ऑनलाइन नेटवर्क के पीछे छिपे अन्य सह-आरोपियों का पूरा सच विधिक रूप से सामने आ पाएगा।