27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सेवन वंडर्स ही नहीं,राजस्थान के इस शहर में बांके बिहारी व निधि वन भी

कोटा.एक संत ने अपने आश्रम की जमीन को भक्तों के नाम किया। भक्तों ने भी संत कृपा का पूरा मान रखा और कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र में बांके बिहारी को विराजमान कर दिया। अब यह शहर के लोगों के लिए आस्था के प्रमुख केन्द्रों में से है।

2 min read
Google source verification

कोटा

image

Hemant Sharma

Aug 12, 2020

banke bihari of kota

सेवन वंडर्स ही नहीं,राजस्थान के इस शहर में बांके बिहारी व निधि वन भी

कोटा.एक संत ने अपने आश्रम की जमीन को भक्तों के नाम किया। भक्तों ने भी संत कृपा का पूरा मान रखा और कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र में बांके बिहारी को विराजमान कर दिया। अब यह शहर के लोगों के लिए आस्था के प्रमुख केन्द्रों में से है। वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर जैसा विग्रह और वहीं से लाकर स्थापित की गई अखंड ज्योत करीब एक दशक से श्रद्धालुओं में भक्ति की ज्योत जला रहे हैं।हालांकि अभी कोरोना काल है और संक्रमण के खतरे को देखते हुए बांके बिहारी के दर्शन श्रद्धालुआें के लिए सुलभ नहीं हैं, लेकिन आमतौर पर यहां सैकड़ों बांके बिहारी के दर्शन को आते हैं।

ठाकुरजी का विग्रह इतना प्रभावशाली है कि छवि के एक बार दर्शन करने के बाद बारंबार दर्शन के प्रति व्याकुलता बनी रहती है। इतना ही नहीं राजस्थान के कोटा शहर में सिर्फ सेवन वंडर्स ही नहीं वृंदावन जैसे निधिवन भी है।मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने लगी तो श्रद्धालुओं की आस्था भी बढऩे लगी। कोटा के श्रद्धालु ही नहीं अब बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी बांके बिहारी के दर्शनों का लाभ लेने के लिए आते हैं।

कहता है इतिहास

मंदिर समिति के पदाधिकारी राजेन्द्र खंडेलवाल बताते हैं कि मंदिर के लिए राधे बाबा ने अपने आश्रम की जमीन दी थी। जनवरी 2008 में मंदिर निर्माण शुरू किया और 15 फरवरी 2010 में मंदिर में ठाकुरजी को विराजमान किया गया। विग्रह वृंदावन मे बांकेविहारी के विग्रह का ही स्वरूप है। इसकी ऊंचाई करीब साढ़े 3 फुट है। मंदिर में देवी सरस्वती, काली व दुर्गा के स्वरूप भी हैं जिन्हें राधे बाबा पूजा करते थे। खंडेलवाल बताते हैं कि मंदिर की स्थापना के करीब 8 वर्ष बाद नगर विकास न्यास ने सामने जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाया, जहां 15 फरवरी 2018 में निधिवन स्थापित किया। यहां राधाकृष्ण के चरण कमल स्थापित हैं।

वर्ष पर्यंत उत्सव

मंदिर समिति में उत्सव संयोजक गिरधर लाल बढ़ेरा बताते हैं कि मंदिर में सुबह 7.55 पर मंगला,11.55पर राजभोग की आरती व शाम को3.50 बजे से दर्शन तथा6.55पर संध्या व रात को 6.25 पर शयन आरती होती है। कृष्ण जन्माष्टमी, होली, अक्षय तृतीया, हरियाली तीज व गुरु पूर्णिमा पर विशेष उत्सव मनाया जाता है।

10 वर्षों से परिक्रमा

खंडेलवाल के अनुसार मंदिर में 10 वर्षों से माह की हर पूर्णिमा पर संकीर्तन परिक्रमा लगाई जाती है। अब तक 130 परिक्रमाएं लगाई जा चुकीं हैं। होली पर हजारों श्रद्धालु इसमें उमड़ते हैं। तलवंडी के राधाकृष्ण मंदिर से होली पर परिक्रमा शुरू होकर नए कोटा के विभिन्न मार्गों से होकर निकाली जाती है। लोगों में उत्साह देखते ही बनता है।