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बाबूजी धीरे चलना, बडे धोखे हैं इस राह में,जरा सम्हलना….!

कोटा. बाबूजी धीर धीरे चलना, बडे धोखे हैं इस राह में,जरा सम्हलना....! इस गीत के बोल कानों में मिश्री घोल देते हैं, पर यहां किसी गीत की बात नहीं हो रही, जिक्र हो रहा है कोटा बैराज रोड का। इस रोड के हालात ही ऐसे हैं। रोड दुर्दशा का शिकार है। इस मार्ग पर जरा भी चूके तो मुश्किल हो सकती है।  

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कोटा

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Hemant Sharma

Dec 21, 2021

बाबूजी धीरे चलना, बडे धोखे हैं इस राह में,जरा सम्हलना....!

बाबूजी धीरे चलना, बडे धोखे हैं इस राह में,जरा सम्हलना....!

कोटा. बाबूजी धीर धीरे चलना, बडे धोखे हैं इस राह में,जरा सम्हलना....! इस गीत के बोल कानों में मिश्री घोल देते हैं, पर यहां किसी गीत की बात नहीं हो रही, जिक्र हो रहा है कोटा बैराज रोड का। इस रोड के हालात ही ऐसे हैं। रोड दुर्दशा का शिकार है। इस मार्ग पर जरा भी चूके तो मुश्किल हो सकती है।

सड़क पूरी तरह उखड़ गई है और इसमें गहरे गड्ढे हो गए हैं। इससे लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा है। रोड पर मिट्टी की इतनी परत जम गई है कि वाहन निकलने के साथ ही धूल के गुबार उड़ते हैं। लोगों ने बताया कि जब से रिवर फ्रंट का कार्य शुरू हुआ है तब से इस सड़क की हालत खराब हो रही है।

दिनभर ट्रकों की रेलमपेल

टिपटा क्षेत्र में जहां से पुलिया शुरू होती है, वहां से ट्रक चंबल के किनारे निर्माण स्थल तक जाते हैं। मार्ग पर हर दिन 100 ट्रक, डंपरों को दिनभर आना जाना लगा रहता है। पुलिया के पास पांच से छह फीट के क्षेत्र में आधे फीट गहरे गड्ढे में कई बार ट्रकों के पहिए फंस जाते हैं। इस दौरान टिपटा से बैराज रोड की ओर जाने वाले लोगों की सांसें अटक जाती है। रोड पर बोट के बालाजी का मंदिर होने के साथ एक निजी स्कूल भी है। इन हालातों में लोगों की परेशानी हो रही है।

काटना पड़ता है चक्कर

बैराज की ओर जाने वाले कई लोग तो दुर्घटना से बचने के लिए ऊपर नई पुलिया से होकर लंबा चक्कर काट कर जाते हैं। लोगों ने बताया कि रिस्क लेने से अच्छा है कुछ दूरी से निकल जाओ।

इनका है कहना

गायत्री औदिच्य व शिव प्रकाश ने बताया कि वे रोजाना कोटा बैराज टहलने के लिए जाते हैं। सड़क की स्थिति ऐसी हो रही है कि पैदल चलने में भी डर लगता है। विकास होना अच्छी बात है, लेकिन साथ में आमजन की समस्याओं का ध्यान भी रखा जाना चाहिए।

क्षेत्र के निवासी घनश्याम सोरल बताते हैं कि जब से चंबल रिवर फ्रंट का कार्य चल रहा है, तब से सड़क की हालत खराब है। ऊपर की पुलिया पर भी धूल जमी है। यहां पास में मंदिर व स्कूल हैं। दुर्घटना का खतरा रहता है। कई बार डंपर गड्ढे में फंस जाते हैं व जाम लग जाता है।

वसीम खान के अनुसार दिन भर ट्रकों की रेलमपेल रहती है। इनमें दुर्घटना का डर सताता है। घरों में धूल उड़ती है। रास्ते से पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। काम पता नहीं कब तक चलेगा, फिलहाल लोगों की सुविधा को देखते हुए सड़क तो बनवानी चाहिए।

एक दुकान पर हेमंत सेन के अनुसार नई पुलिया के प्रारंभ से कोटा बैराज तक सड़क की हालत खराब है। बोट के बालाजी व बैराज वाले गणेशजी का मंदिर होने से काफी श्रद्धालु आते हैं, उन्हें परेशान होना पड़ता है। कई लोग ट्रैफिक से बचने के लिए बैराज होकर ही जाते हैं।