
देर आए दुरस्त आए। ढाई दशक के लम्बे इंतजार के बाद राज्य के तीसरे बड़े शहर कोटा में नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का हवा-हवाई सपना अब जमीन पर आया है। लोकसभा अध्यक्ष एवं कोटा-बूंदी के सांसद ओम बिरला के प्रयासों से कोटा के बहुआयामी सपने को परवाज मिली है। नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण के लिए जमीन के आवंटन की प्रक्रिया भी लम्बे समय से अटकी थी। केन्द्र व राज्य सरकार के बीच साझा सहमति नहीं बन पाने के कारण कोटा का सपना (Big Dream of Kota ) अटकता रहा।
अब राज्य सरकार की ओर से नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण के लिए 1250 एकड़ जमीन के नि:शुल्क आवंटन का निर्णय हो चुका है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने केन्द्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चर्चा कर एयरपोर्ट निर्माण के लिए नि:शुल्क जमीन आवंटन का मार्ग प्रशस्त करवाया। अटके सपने को गति देने में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के प्रयास भी अहम है। निसंदेह राज्य से लेकर केन्द्र तक कोटा के राजनीतिक वर्चस्व के साझा प्रयास से ही यह संभव हुआ है।
नए एयरपोर्ट के लिए नि:शुल्क जमीन आवंटन के साथ ही जनता की उम्मीदें फिर परवान चढ़ गई है। मेडिकल व इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए प्रसिद्ध कोचिंग सिटी कोटा का जुड़ाव देशभर से हैं। हर साल लाखों विद्यार्थी यहां कोचिंग करने आते हैं। ऐसे में एयरपोर्ट बनने से कोटा के विकास को गति मिलेगी। अब यह सपना पहले के सालों की तरह अटकना नहीं चाहिए।
नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि कोटा से छोटे शहर अजमेर के किशनगढ़, बीकानेर, जैसलमेर तक एयरपोर्ट बन चुके हैं। इसलिए कोटा के इस काम में अब कोई बाधा नहीं आ पाए और नए एयरपोर्ट के निर्माण कार्य की गति भी अटके नहीं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को भी नए एयरपोर्ट निर्माण में देरी नहीं करनी चाहिए। कोटा की जनता के दिल से जुड़े इस सपने पर बगैर राजनीति के काम होगा तो निश्चित रूप से कोटा के आसमान में जल्द हवाईजहाज उड़ते दिखाई देंगे। कोशिश हो कि नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट सरकार के शेष रहे कार्यकाल में ही मूर्त रूप ले लें।
Published on:
25 Jul 2021 10:22 pm
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