
चम्बल हॉस्टल एसोसिएशन की पहल : हॉस्टल्स में लगाई जा रही ऑनलाइन बायोमेट्रिक थम्ब इम्प्रेशन मशीनें ।
माता-पिता से दूर रहकर कोटा में कोचिंग कर रहे बच्चों की खैरियत जानने के लिए अब अभिभावकों को ङ्क्षचता करने की जरूरत नहीं रहेगी। हॉस्टल से कोचिंग के लिए बच्चा किस समय निकला और कब वापस आया? इसकी सूचना सुदूर प्रांतों में बैठे अभिभावकों को तत्काल मिल सकेगी।
नदी पार क्षेत्र में चम्बल हॉस्टल एसोसिएशन ने बायोमेट्रिक मशीन को एक सॉफ्टवेयर से जोड़ा है, जो अभिभावकों को बच्चे के हॉस्टल में आने और जाने की जानकारी एसएमएस के द्वारा तत्काल भेज देगा। एसोसिएशन ने यह मशीनें नदी पार क्षेत्र के सभी हॉस्टल संचालकों को लगाने के लिए निर्देशित किया है।
बायोमेट्रिक मशीन में छात्रों के फिंगर प्रिंट स्कैन किए गए है। ज्यों ही छात्र मशीन में अंगूठा या अंगुली लगाएगा। अभिभावक, हॉस्टल के मैनेजर, वार्डन के मोबाइल पर मैसेज पहुंचेगा। मशीन में फेस डिस्टेक्शन का भी ऑप्शन उपलब्ध है। इस मशीन का उपयोग छात्र को हॉस्टल में प्रवेश करते, निकलते समय करना होगा।
अभिभावकों को हमेशा रहती है चिंता
माता पिता से कोसों दूर रहकर बेटे-बेटी यहां पढ़ाई करते हैं। एेसे में उन्हें चिंता रहती है कि बच्चे कोचिंग से निकलकर हॉस्टल पहुंचे या नहीं? शहर में आए दिन कोचिंग छात्रों द्वारा आत्महत्या करने से भी परिजनों की चिंता लगातार बढ़ी हुई रहती थी। इसको लेकर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार हॉस्टलों की मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार ही यह मशीन तैयार करवाई गई है।
नदी पार क्षेत्र के सभी हॉस्टल संचालकों को कोचिंग छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक मशीन लगाने के निर्देश दिए हैं। करीब 40 फीसदी हॉस्टलों में तो यह मशीनें लगाई जा चुकी हैं, जिसमें स्टूडेंट्स की हॉस्टल से इन, आउट की फिडिंग की जा रही है। जिसका मैसेज तत्काल स्टूडेट्स के माता-पिता, हॉस्टल मैनेजर, वार्डन को पहुंच रहा है। इस क्षेत्र में करीब 6 हजार बच्चे इस मशीन का उपयोग कर रहे हैं।
विश्वनाथ शर्मा, अध्यक्ष, चम्बल हॉस्टल एसोसिएशन, कोटा
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