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नहरों की कागजी सफाई, टेल तक कैसे पहुंचेगा पानी?

सीएडी ने रबी सीजन की फसलों को जीवनदान देने के लिए चम्बल की नहरों में पानी छोड़ दिया है, लेकिन नहरें झाड़-झंकाड़, घास-फूस व कचरे-गंदगी से अटी पड़ी हैं। सवाल यह है कि इस स्थिति में टेल (अंतिम छोर) तक पानी कैसे पहुंचेगा? किसान अपने खेतों की प्यास कैसे बुझाएंगे?

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वर्ष 2011-12 में नहरी तंत्र की मरम्मत के लिए स्वीकृत 1275 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो पाए

नहरों की कागजी सफाई, टेल तक कैसे पहुंचेगा पानी?

सीएडी ने रबी सीजन की फसलों को जीवनदान देने के लिए चम्बल की नहरों में पानी छोड़ दिया है, लेकिन नहरें झाड़-झंकाड़, घास-फूस व कचरे-गंदगी से अटी पड़ी हैं। सवाल यह है कि इस स्थिति में टेल (अंतिम छोर) तक पानी कैसे पहुंचेगा? किसान अपने खेतों की प्यास कैसे बुझाएंगे? सीएडी ने बुधवार से दाईं मुख्य नहर में 1 हजार क्यूसेक पानी छोड़ दिया, जिसे किसानों की मांग को देखते हुए धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा।

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सीएडी ने अधूरी मरम्मत व बिना साफ-सफाई के नहरों में जल प्रवाहित कर दिया। ग्रामीण क्षेत्र में नहर की ब्रांचें व माइनर झाडिय़ों से अटी पड़ी हैं। माइनरों की टूटी दीवारों की मरम्मत तक नहीं हुई। इससे टेल क्षेत्र के किसानों को पानी मिल पाएगा या नहीं, इसे लेकर ङ्क्षचता सताने लगी है। किसानों का कहना है कि पहले अतिवृष्टि ने मेहनत पर पानी फेर दिया। अब रबी सीजन की फसल में किसान मेहनत कर बुवाई कर रहे हैं, लेकिन सीएडी प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत व साफ-सफाई केवल कागजों में ही करवाने से टेल क्षेत्र तक पानी के लिए तरसना पड़ेगा।

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चम्बल का नहरी तंत्र
दाईं मुख्य नहर
6600 क्यूसेक जल प्रवाह क्षमता
124 किलोमीटर राजस्थान में
248 किलोमीटर मध्यप्रदेश में
1.27 लाख हैक्टेयर भूमि राजस्थान में होती है ङ्क्षसचित
3.70 लाख हैक्टेयर भूमि मध्यप्रदेश में होती ङ्क्षसचित

बाईं मुख्य नहर से ङ्क्षसचाई
नहर पानी की क्षमता 1500 क्यूसेक
बाईं मुख्य नहर 1.02 लाख हैक्टेयर

झाड़-झंकाड़ से ढकी नहर
दाईं मुख्य नहर की इटावा केनाल ब्रांच सफाई नहीं होने से बुरा हाल है। किसान नन्दराम नागर ने बताया कि केनाल में जगह जगह मिट्टी जमा हो रही है। वहीं इसकी वितरिका व माइनरों की हालत भी ठीक नहीं है। जगह जगह से टूटी पड़ी हैं या इनमें झाडिय़ां व घास उग आई है। जोरावरपुरा वितरिका की माइनर क्षतिग्रस्त हालत में है। उसमें झाड़ झंकाल उग रही है। अयाना ब्रांच की मुख्य केनाल में पिछले दिनों मनरेगा मजदूरों से सफाई करवाई गई, लेकिन अनियमितता के चलते केनाल के पेंदे में घासफूस तथा मलबा जमा है।

मरम्मत के नाम पर लीपापोती
हाड़ौती किसान यूनियन के दशरथ कुमार ने बताया कि दाईं मुख्य नहर से ग्रामीण क्षेत्र में निकलने वाली ब्रांचों, माइनरों व वितरिकाओं के बुरे हाल हैं। सीएडी की नाक के नीचे शहर के बीच से निकलने वाली किशनपुरा ब्रांच दुर्दशा की शिकार है। मरम्मत के नाम पर सीएडी व न्यास ने लीपापोती कर दी। थेगड़ा से बोरखेड़ा तक नहर के दोनों हिस्सों की टूटी दीवारों की मरम्मत के नाम पर कुछ माह पहले सीएडी ने काम शुरू किया, लेकिन कुछ स्थानों पर मरम्मत कर बाकी जगह टूटी पड़ी दीवारों को ऐसे ही छोड़ दिया। नहर में कचरे के ढेर लगे है। इतना ही नहीं इस नहर में कचरे व मलबे की ट्रॉलियां तक खाली कर रखी है। किसान मोतीलाल सुमन ने बताया कि कालातालाब में टूटी पड़ी माइनर पर कुछ जगह मरम्मत के नाम पर लीपापोती कर दी गई।

1275 करोड़ का बजट खर्च नहीं कर पाए
किसान नेता दशरथ कुमार ने बताया कि सीएडी प्रोजेक्ट से वर्ष 2011-12 में 1275 करोड़ रुपए चम्बल की नहरों के रख रखाव के लिए स्वीकृत हुए थे, लेकिन जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की इच्छाशक्ति कमी के चलते मरम्मत पर बजट खर्च नहीं हो पाया। अगर इस बजट से नहरी तंत्र की मरम्मत का काम हो जाता तो 1300 क्यूसेक पानी व्यर्थ नहीं बहता और 70 से 80 हजार हैक्टेयर अधिक भूमि ङ्क्षसचित होती।