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चम्बल के बांधों को चाहिए और अधिक बरसात

बांधों से होती राजस्थान व मध्यप्रदेश की 4 लाख 29 हजार हैक्टेयर भूमि सिंचित। अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों पर रहेगा संकट। अभी तक 44 बांधों में से 30 बांध 50 प्रतिशत से भी कम भरे हैं।  

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mandsaur file photo

कोटा. हाड़ौती में मानसून की अच्छी बारिश का इंतजार है। अच्छी बारिश नहीं होने से हाड़ौती के 44 छोटे-बड़े बांधों में से 30 बांध 50 प्रतिशत से ही कम भरे हुए हैं। सदानीरा बहने वाली चम्बल के बांधों में ही पानी भरा है। शेष बांधों में लगभग पानी खत्म सा हो गया है। चम्बल के मध्यप्रदेश में बना सबसे बड़ा गांधीसागर बांध, रावतभाटा में राणाप्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध व कोटा बैराज 50 से 96.31 प्रतिशत भरे हुए हैं। चम्बल के बांधों के कैचमेंट क्षेत्र में कम बारिश हो रही है। इसलिए चिंता बनी हुई है। चम्बल के गांधीसागर, राणाप्रताप सागर बांध के भरने पर ही राजस्थान व मध्यप्रदेश की खेती निर्भर है। कोटा में 1 जून से 18 जुलाई तक 107 एमएम बारिश हुई है।

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चम्बल के बांधों से सिंचित भूमि
चम्बल के बांधों के पानी से राजस्थान में 2 लाख 29 हजार हैक्टेयर व मध्यप्रदेश की भी इतनी ही 2 लाख 29 हजार हैक्टेयर भूमि सिंचित होती है।

हाड़ौती के इन बांधों में पानी नहीं
बारां में बैथली, गोपालपुरा, हिंगलोट, बिलास, उम्मेद सागर, कालीकोट छत्तरपुरा, इकलेरा सागर, उतावली बांध सूखे पड़े हैं। बूंदी जिले में बरधा बांध, गोठड़ा, डूंगली, पैबालपुरा, चाकन अभयपुरा, बड़ानयागांव, पेच की बावड़ी, मछाली, इंदिरानी, रुणीजी बांध सूखे पड़े हैं। झालावाड़ में सरनखेड़ी, कनवाड़ा, सारोला, मुंडालिया खेड़ी व कोटा में सावनभादौ बांध खाली पड़ा है।

इन बांधों में नाममात्र का पानी
कोटा के आलनिया, झालावाड़ जिले के छापी, भीमसागर, राजगढ़, चवली, पीपलाद, गागरिन, गुलखेड़ी, कालीखार, भूमानी, रेवा, बारां जिले में ल्हासी, रतन, बूंदी जिले के भीमलत व गुड़ा गांध में नाममात्र का पानी है। जबकि यह आसपास क्षेत्रों के लिए लाइफ लाइन है।

यहां बांध खाली
-कोटा में 3 में से 2 बांध 50 प्रतिशत से कम
-बूंदी में 14 में से 13 बांध 50 प्रतिशत से कम
-झालावाड़ में 15 बांध में से 14 बांध 50 प्रतिशत से कम
-बारां में 12 में से 11 बांध 50 प्रतिशत से कम

बांध- क्षमता - भराव
कोटा

गांधीसागर- 1312- 1290
राणाप्रताप सागर- 1157.30- 1142.53

जवाहर सागर बांध- 980-973.10
कोटा बैराज- 854-851.90

अलनिया- 35- 30.47
सावनभादौ- 44.61- 0


झालावाड़ जिला
कालीसिंध- 32.80- 25.95
भीमसागर- 40- 06
चवली- 30.47- 3.51
राजगढ़ बांध- 56.45- 8.85
छापी- 42.32- 11.81
गागरोन- 22.96- 16.07
बारां
रताई बांध- 20.01- 4.49
बैथली बांध- 31.49- 0
ल्हासी- 19.68- 0.78
बूंदी
गुढ़ा बांध- 34.50- 1.70
बरधा बांध- 21 - 0
भीमलत बांध- 36- 4.90
(स्त्रोत: जलसंसाधन विभाग, भराव-क्षमता फीट में है)

इनका यह कहना
इस बार मानसून आगे खिसका है, लेकिन 15 सितम्बर तक मानसून का सीजन रहता है। गांधीसागर में जितना पानी है उससे इस साल राजस्थान व मध्यप्रदेश की प्यास बुझा सकते हैं और खेतों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवा सकते हैं।
-एजाजुद्दीन अंसारी, अधीक्षण अभियंता, जलसंसाधन विभाग, कोटा