Chambal Garden: कोटा. घर में कोई बच्चा रूठ जाता था तो मां कहती थी, बेटा, शाम को चंबल गार्डन घूमने चंलेंगे। बच्चे अपनी जिद को भूल कर शाम का इंतजार करते…। करीब आधा किलोमीटर लंबे गार्डन में कितनी ही देर ठहरते, घूमते, झूलते पर लगता था अभी तो आए ही हैं। यहां के हरियाली, झूले, मूर्तियां हर चीज खूब पसंद आती। अभी भी सब कुछ हैं, लेकिन अनदेखी के चलते इसकी चमक लगातार फीकी पड़ रही है। न झूले बच्चों को आकर्षित कर रहे हैं, न फव्वारे।
पहले कोटा के अलावा हाड़ौती समेत अन्य जगहों से कोई आता तो घूमने के लिए चंबल गार्डन पहली प्राथमिकता होती थी, अब प्रशासनिक अनदेखी से लोगों का आकर्षण फीका हो रहा है। कहीं कचरे का ढेर तो कहीं टूटे झूले और टूटी दीवारें यहां आने वाले लोगों को चुभती है। लोगाें ने बताया कि शहर में करोड़ों के विकास कार्य हो रहे हैं, इधर चंबलगार्डन के विकास की ओर किसी का ध्यान नहीं है।चंबल के किनारे होने से इससे अच्छा पार्क और कोई नहीं हो सकता।
यह दिखे हाल
चंबल गार्डन की चारदीवारी के पास कचरे का ढेर नजर आया। परिसर में दीवार के पास कचरा पात्र कचरे से भर दिखा। आसपास कचरा खिरा पड़ा हुआ था। दरवाजे के पास वाले भाग में घांस सुखी नजर आई, वहीं श्वान घूमते दिखे। गार्डन में फिसल पट्टी व अन्य झूले लगे हुए हैं। इनमें से एक फिसल पट्टी में बीच बीच में काफी गेप नजर आए। लोगों ने बताया कि इसमें बच्चों के पैर फसने, कपड़े उलझने का डर है।अधिकतर फंव्बारे बंद हैं। बोटिंग स्टैंड पर बने भवन की दीवार का छज्जा झूलता नजर आया। यह भारी भरकम छज्जा कभी भी धराशाही होकर मुश्किल खड़ी कर सकता है।
संवरे इसका रूप
चंबल गार्डन परिवार के साथ महावीर नगर से घूमने आई अर्चना व चेतना मीणा ने कहा कि हम यहां वर्षों से आ रहे हैं, लेकिन गत वर्षों में पार्क की जो दुर्दशा हुई है, ऐसी कभी नहीं हुई। यह पार्क बच्चों व बड़ों को काफी प्रिय है, लेकिन इसके बावजूद इसकी अनदेखी हो रही है। आज मां को पार्क घूमाने लाए, लेकिन यहां ठीक से साफ सफाई भी नहीं है। इसकी हालत में सुधार करना चाहिए।
मांगरोल के असगर अली ने ब ताया कि कोटा आए तो बच्चों को चंबल गार्डन दिखाने ले आए। बच्चों में झूलों का आकर्षण होता है, लेकिन यहां अधिकतर झूले टूटे पड़े हैं। बच्चों के गिरने का डर रहता है। एक मात्र ट्रेन चल रही है। पार्क का पहले जैसा आकर्षण भी नहीं रहा। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। यह कोटा का सबसे पुराना पार्क है।- असगर अली, मांगरोल
नीमच से आए दिनेश अहीर ने कहा कि पार्क का नाम काफी सुना है। मैं करीब 10 वर्ष पहले यहां आया था। चंबल के किनारे होने से यह आकर्षित करता है। ऐसे पार्क अन्य जगहों पर देखने को नहीं मिलते, लेकिन इसकी िस्थति को देखकर लग रहा है कि इसकी देखरेख नहीं हो रही। फव्वांरे भी बंद पड़े हैं। यहां तक कि चंबल के किनारे होने के बावजूद घांस सुखी हुई है। कई जगहों पर टूटफूट भी हो रही है। इसका विकास करना चाहिए।
आगरा से चंबलगार्डन देखने आए विशाल सिंह ने कहा कि हम लोग पहले कोटा में रहते थे , तो चंबल गार्डन घूमने आते थे। आज आए तो लगा कि पहले जैसी बात नहीं है। लक्ष्मण झूले के बाद घडि़याल देखबा काफी अच्छा लगता था। झूले भी आकर्षित करते थे, अब िस्थति अच्छी नहीं है। यह गार्डन वास्तव में काफी खूबसूरत है। शहर में जगह जगह विकास चल रहे हैं, रिवर फ्रंट बन रहा है, इस पुराने रिवर फ्रंट की भी सरकार को सुध लेनी चाहिए।-