
एडीएम से मिलते प्रसूताओं के परिजन और रोती बच्ची का फोटो: पत्रिका
Kota Medical College Case: कोटा मेडिकल कॉलेज के सुपरस्पेशलिटी वार्ड में मशीनों की आवाजों के बीच कुछ मासूम आंखें हर दिन अपनी मां के जागने का इंतजार कर रही हैं। किसी की पत्नी वेंटिलेटर पर जिंदगी से जंग लड़ रही है, तो कोई परिवार अस्पताल के गलियारों में सिर्फ एक सच्ची जानकारी की उम्मीद लेकर भटक रहा है।
इस बीच कोटा एडीएम सिटी के दफ्तर से एक ऐसी तस्वीर आई, जिससे हर किसी का दिल टूट गया। बुधवार को साढ़े सात साल की बच्ची तृषा ने एडीएम सिटी के सामने रोते हुए कहा कि ‘मुझे मम्मी की बहुत याद आती है, रात को नींद नहीं आती।’ उसकी आंखों में डर था, इंतजार था और एक मासूम उम्मीद थी कि कोई उसकी मां को ठीक कर दें। तृषा की मां रागिनी चार मई से कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती है। सीजेरियन डिलीवरी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी।
उधर अस्पताल के बेड पर भर्ती प्रसूताएं जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं, लेकिन उनके परिजनों का दर्द इससे भी बड़ा है। उन्हें अब तक यह तक नहीं बताया गया कि आखिर उनके अपने किस हालत में हैं। किसी की पत्नी 20 दिन से अस्पताल में भर्ती है कोई डायलिसिस पर है तो किसी को घर ले जाने की सलाह दी जा रही है, जबकि परिवार के पास प्राइवेट इलाज कराने तक के पैसे नहीं हैं। अस्पताल के बाहर खड़े इन परिवारों की आंखों में सिर्फ आंसू नहीं, बल्कि सिस्टम से टूटता भरोसा भी साफ दिखाई दे रहा है।
एडीएम सिटी विनोद कुमार मल्होत्रा को बुधवार को तीन प्रसूताओं रागिनी, पिंकी बेरवाल और सुशीला के परिजन ज्ञापन देने पहुंचे। पीड़ित परिवारों ने कहा कि हॉस्पिटल प्रशासन पेशेंट की स्थिति के बारे में सही जानकारी दें। उनकी मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक करें, ताकि वास्तविक स्थिति का पता चल सके। बता दें कि सुशीला का 3 मई और पिंकी का 7 मई से इलाज चल रहा है। हॉस्पिटल में भर्ती रागिनी और पिंकी को बुखार चढ़ा हुआ है। वहीं सुशीला की डायलिसिस कराई जा रही है।
रागिनी के भाई विकास ने कहा कि कई दिन बीत चुके हैं। वहीं अभी तक रागिनी की रिपोर्ट के बारे में हमें पता नहीं है। न ही हॉस्पिटल प्रशासन ने रागिनी की मेडिकल रिपोर्ट के बारे में बताया। जब भी कोई टीम आती है, हॉस्पिटल के डॉक्टर और स्टाफ ही डिस्कस करते हैं। वे ही बताते हैं। हमें वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं है। रागिनी की बॉडी में कितना कॉम्प्लिकेशन, इंफेक्शन है। ठीक होने की स्थिति है भी या नहीं। हमें कुछ भी पता नहीं।
किशोरपुरा (सुल्तानपुर) निवासी नरेश ने बताया कि पत्नी पिंकी को 7 मई को भर्ती करवाया था। तब से इलाज चल रहा है। एक बार अंदर बुलाकर कहा था कि ‘घर ले जाओ, साथ रहेगी तो तबीयत ठीक हो जाएगी।’ अभी पिंकी की स्थिति पहले जैसी है। एक-दो बूंद टॉयलेट आता है। पिंकी को दो बार वेंटिलेटर पर ले चुके हैं।
ओमप्रकाश ने बताया कि मेरी पत्नी सुशीला हॉस्पिटल में भर्ती है। शुरुआती 3 दिन तक सुशीला की तबीयत ठीक थी। इसके बाद तबीयत बिगड़ी। अभी तक ठीक नहीं हो पाई। अभी स्थिति यह है कि 5-10 एमएल टॉयलेट आ रहा है। हॉस्पिटल वाले कह रहे हैं कि घर ले जाओ, वहां तबीयत ठीक हो जाएगी।
वहीं मेरी स्थिति ऐसी नहीं है कि मैं सुशीला का प्राइवेट इलाज करवा सकूं। बता दें कि कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और जेके लोन अस्पताल में 12 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी थी। इनमें से कुल 5 महिलाओं की मौत हो गई थी। एक डिस्चार्ज हो चुकी है। शेष अन्य का इलाज जारी है।
Updated on:
28 May 2026 08:08 am
Published on:
28 May 2026 08:06 am
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