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बाल दिवस विशेष: कोटा से चाचा नेहरू का रहा गहरा नाता

बाल दिवस 14 नवम्बर को मनाया जाएगा। बच्चे प्रिय चाचा नेहरू को याद करेंगे, तो विभिन्न संस्थाओं की ओर से भी आयोजन होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि चाचा नेहरू का कोटा के विकास से गहरा रिश्ता रहा है। चम्बल के इस पार से उस पार तक सफर तय कराने वाले चार बांधों में एक बांध कोटा बैराज की नींव रखी गई थी। उसके बाद चाचा नेहरू इसे 1962 में कोटा की जनता को सौंपा था। इसके अलावा पार्क व शिक्षा का एक मंदिर चाचा नेहरू की याद दिलाते है।  

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कोटा

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Abhishek Gupta

Nov 14, 2022

बाल दिवस विशेष: कोटा से चाचा नेहरू का रहा गहरा नाता

बाल दिवस विशेष: कोटा से चाचा नेहरू का रहा गहरा नाता

बाल दिवस 14 नवम्बर को मनाया जाएगा। बच्चे प्रिय चाचा नेहरू को याद करेंगे, तो विभिन्न संस्थाओं की ओर से भी आयोजन होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि चाचा नेहरू का कोटा के विकास से गहरा रिश्ता रहा है। चम्बल के इस पार से उस पार तक सफर तय कराने वाले चार बांधों में एक बांध कोटा बैराज की नींव रखी गई थी। उसके बाद चाचा नेहरू इसे 1962 में कोटा की जनता को सौंपा था। इसके अलावा पार्क व शिक्षा का एक मंदिर चाचा नेहरू की याद दिलाते है।

62 बरस का हुआ कोटा बैराज

कोटा बैराज का लोकार्पण 20 नवम्बर 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने किया था। 20 नवम्बर को यह बांध 62 वर्ष पूरे करने जा रहा है, तब से अब तक इन छह दशकों से यह कोटा के विकास की नई गाथा लिख रहा है। लाखों शहर वासियों की प्यास चम्बल पर बने कोटा बैराज से बूझ रही है तो राजस्थान व मध्यप्रदेश की जमीं को सरसब्ज कर रहा है। कोटा बैराज के अधिशासी अभियंता भारत रत्न गौड़ ने बताया कि कोटा बैराज बांध का निर्माण कार्य 1953 से शुरू हुआ था, 20 नवम्बर 1960 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने इसका लोकार्पण किया था। बांध के 19 गेट है। इसकी भराव क्षमता 112.06 मिलियन क्यूबिक मीटर है। कोटा बैराज के पानी से कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन उपयोग आता है। कोटा व बूंदी शहर व औद्योगिक क्षेत्र में पानी की आपूर्ति की जाती है। बांध के पानी से राजस्थान व मध्यप्रदेश की 4 लाख 58 हजार हैक्टेयर जमीन सिंचित हो रही है।

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स्कूल व पार्क का नाम भी नेहरू के नाम

स्टेशन रोड पर जवाहर लाल नेहरू राउमावि स्कूल बना हुआ है। यहां 12वीं तक कक्षाएं संचालित होती है। इस स्कूल से सैंकड़ों बच्चे यहां से पढ़कर अपना भविष्य बना चुके है और देश के विकास अपना योगदान दे रहे है। यह स्कूल हॉकी का प्रशिक्षण केन्द्र रहा। यहां से निकले खिलाडि़यों ने राष्ट्रीय व राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में अपना नाम कमाया है। यहां नेहरूजी की प्रतिमा है। स्कूल में होने वाले किसी भी कार्यक्रम की शुरूआत नेहरूजी से ही होती है। नेहरूजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाता है। इसके अलावा स्टेशन रोड पर ही नेहरू पार्क बना हुआ है, जो आकर्षण का केन्द्र है और आते-जाते लोगों को नेहरूजी की याद दिलाता है।