1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सीएलजी सदस्यों की फौज, कोटा रेंज में कर रही मौज, पुलिस के चंगुल में फंसे लोगों की खाकी से कराते हैंं सेटिंग

Police & CLG members: अपराध पर अंकुश व अपराधियों की जड़ें काटने के बजाए सीएजी सदस्‍य पुलिस के चंगुल में फंसे लोगों की सेटिंग करवाने मेें व्‍यस्‍त है।

2 min read
Google source verification

कोटा

image

Zuber Khan

Jul 27, 2019

nagaur

सीएलजी सदस्यों की फौज

विनीत सिंह@ कोटा. चाय-नाश्ते तक सिमटी बैठकें... पब्लिक पर धौंस जमाते गाडिय़ों पर चस्पा मोटे स्टीकर...और पुलिस के चंगुल में फंसे लोगों की सेटिंग को दौड़ते अनेक सदस्य... अपराध पर अंकुश लगाने और अपराधियों की जड़ें काटने के लिए गठित कम्युनिटी लाइजिंग ग्रुप सीएलजी ( Community Liaison Group CLG ) की हाड़ौती में असल तस्वीर कुछ ऐसी ही है। पुलिस मुख्यालय ( Police headquarters) मार्च में ही सीएलजी ( Police & CLG members ) की छंटनी के आदेश दे चुका है, लेकिन उस पर अभी तक अमल नहीं हो सका है।

Read More: बंधी के लिए खाकी ने अपनों को ही लगाया ठिकाने तो राजस्थान में ध्वस्त हुआ पुलिस का मुखबिर नेटवर्क, भरोसा उठा तो छूटे पसीने

समाज में बेलौस साख, अपराधियों की नजर में बेखौफ शख्सियत, अपराध को काबू करने में दिलचस्पी और भीड़ की समझाइश में माहिर लोगों की मदद लेने के लिए पुलिस महकमे ने सामुदायिक समन्वय समूहों (सीएलजी) का गठन किया था। मदद के नाम पर कोटा रेंज के पांच जिलों में सौ पांच सौ नहीं, बल्कि 10,451 सीएलजी सदस्यों की फौज खड़ी कर ली गई, लेकिन अपराधियों की लगाम कसना तो दूर पुलिस ( Police ) इनके जरिए पब्लिक का भरोसा तक नहीं जीत पाई। कोटा रेंज ( kota Range Police) में जिला स्तर पर 189, थानों में 2376, बीट में 5834, पंचायत में 1611 और वार्डों में बिखरे गली कूचों तक 441 सीएलजी सदस्यों की लंबी चौड़ी फौज मौजूद है, लेकिन लूट,डकैती, रेप और हत्याओं की तो बात छोडि़ए छेड़छाड़ और लोगों के आपसी झगड़ों तक में पुलिस इन लोगों की मदद नहीं ले पाई।

Read More: गोल्ड लूट गैंग का इन्वेस्टर है तेलिया, मनीष सिंह के इशारे पर हत्याएं करता था कुख्यात शूटर रुदल राय

कसीदे पढऩे वालों की पौ बारह!
पुलिस तो यही दावा करती है कि कम्युनिटी पुलिसिंग की बारीकियां जानने और पुलिस एवं पब्लिक के बीच समन्यव सेतु का फर्ज बेहतरी से निभा सकने वाले समाज के मुअज्जिज लोगों को ही सीएलजी सदस्य बनाया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि उसमें पूरी तरह से थानों की सिफारिश और मर्जी ही चलती है। नतीजतन, ऐसे लोगों का चुनाव किया जाता है जो बैठकों में पुलिस की मुखालफत करने के बजाय चाय नाश्ता करें और चलते बनें। पुलिस अपना काम निकलती है तो सदस्य भी कहां पीछे रहने वाले। वह भी खाकी से नजदीकियां बढ़ाने में जुट जाते हैं। इतना ही नहीं प्रतिबंध के बावजूद राजनीतिक दलों के सदस्यों को धड़ल्ले से समितियों में जगह दी जाती है।

Manappuram Gold Robbery: आखिर कहां ठिकाने लगाया देशभर से लूटा 500 करोड़ का सोना, अब तेलिया उगलेगा राज

सुझावों का सूखा
सीएलजी बैठकों की कार्रवाई बकायदा एक रजिस्टर में दर्ज की जाती है। पिछली बैठक की समीक्षा करने के साथ ही पुलिसिंग में सुधार के सुझाव, क्षेत्रीय जनता की समस्याएं और पुलिसकर्मियों की शिकायतों के साथ-साथ अपराधियों एवं आपराधिक गतिविधियों की जानकारी का लेखा जोखा भी इसी रजिस्टर में रखा जाता है, लेकिन पूरी रेंज के ज्यादातर रजिस्टरों में इसका सूखा पड़ा हुआ है।