
कोटा .
शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए नगर निगम प्रशासन हर महीने मोटा बजट खर्च कर रहा है। बड़ी संख्या में संसाधन खरीदे, घर-घर कचरा संग्रहण चालू है, लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं है। जिला प्रशासन ने भी माना है कि अब भी शहर की सबसे बड़ी समस्या सफाई नहीं होना ही है। न समय पर कचरा उठता है और सफाई होती है। निगम क्षेत्र के गांवों में तो सफाई होती ही नहीं।
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जिला कलक्टर ने करीब 3 माह पहले सफाई समेत शहर की प्रमुख समस्याएं चिह्नित कर उनके समाधान के लिए 'सिटी मॉनिटरिंग वॉट्सएप ग्रुप बनाया। ग्रुप से प्रशासन समेत विभिन्न विभागों के 15 प्रमुख अधिकारियों को जोड़ा है। इसमें निगम आयुक्त भी जुड़े हैं। एडमिन जिला कलक्टर व एडीएम सिटी हैं। हर माह 22 से 25 तारीख के बीच कलक्टर खुद इसकी समीक्षा बैठक लेते हैं। हर माह करीब डेढ़ सौ समस्याएं ग्रुप में आती है।
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फीडबैक : सहयोग नहीं करते निगम अफसर
सफाई-व्यवस्था सुधारने के लिए कलक्टर के निर्देशन में अधिकारियों की टीम ने काम शुरू किया तो निगम के स्वास्थ्य निरीक्षकों ने नित नए बहाने बनाना शुरू कर दिया। अधिकारियों ने फीडबैक दिया कि निगम अधिकारी सहयोग नहीं करते हैं। सफाई के संबंध में स्वास्थ्य निरीक्षकों को फील्ड में साथ ले जाने के लिए फोन करते हैं तो कहते हैं कि सुबह 11 बजे उनकी फील्ड की ड्यूटी पूरी हो गई।
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अधिकारी मौके से डालते हैं फोटो
इस सिटी मॉनिटरिंग ग्रुप के माध्यम से समस्या जाने के लिए अब प्रत्येक अधिकारी को पांच से आठ वार्ड आवंटित हैं। अधिकारी वार्डों का औचक निरीक्षण कर सफाई-व्यवस्था का जायजा लेते हैं। मौके से समस्या के फोटो डालते हैं। संबंधित विभाग ने समाधान के क्या प्रयास किए, इसकी जानकारी भी ग्रुप में डाली जाती है। यदि कचरा प्वाइंट से कचरा नहीं उठने की समस्या का अधिकारी ने फोटो डाला है तो नगर निगम की ओर से कचरा प्वाइंट से कचरा उठाने व सफाई का फोटो डालना होता है।
चिह्नित समस्याएं और हकीकत
1. सफाई की क्या स्थिति : कचरा नहीं उठता है। टिपर आसपास ही कचरा
खाली कर देते हैं।
2. कचरा प्वाइंट : दिनभर कचरा फैला रहता है। रविवार को एक भी प्वाइंट से कचरा नहीं उठता।
3. ट्रेचिंग ग्राउण्ड तक कचरा परिवहन : एक माह में 40 वाहनों को इधर-उधर कचरा डालते पकड़ा।
4. नाले-नालियों की क्या स्थिति : मलबे से अटे हैं, सफाई नहीं होती।
5. खाली भूखण्डों पर गंदा पानी-कचरा : ज्यादातर पर कचरा और गंदा पानी है। निगम और न्यास नोटिस देकर इतिश्री करते हैं।
6. अतिक्रमण : समस्या पूरे शहर में है, चौराहों से लेकर मुख्य मार्गों तक पर अवैध कब्जे हैं।
7. जलापूर्ति, पाइप लाइन के हाल : ज्यादातर इलाकों में संतोष जताया है।
8. रोड लाइटों की क्या स्थिति है : कई क्षेत्रों में रोड लाइटें खराब पड़ी है। ग्रुप पर फोटो डालने पर भी दुरुस्त नहीं हुई।
9. टांसफॉर्मरों के चारों तरफ तारबंदी है या नहीं : ज्यादातर ट्रांसफॉर्मरों के तारबंदी हो रखी है।
10. कॉलोनियों में बिजली खम्भे : कृषि भूमि की कॉलोनियों में तार झूलते मिले, खम्भे भी झुके हुए। बिजली कम्पनी ने कॉलोनाइजर के खम्भों पर ही तार खींच दिए।
Published on:
02 Apr 2018 02:06 pm
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