
कोटा . भले ही आयकर विभाग अब संविदा कार्मिकों पर भरोसे से तौबा कर रहा हो, लेकिन कड़वा सच यह कि महज कम्प्यूटर और टेक्नो कार्य के वास्ते विभाग में लगे संविदा कार्मिकों को सर्राफा व्यवासायी के यहां हुई कार्रवाई की यूं ही सारी जानकारियां उपलब्ध नहीं हो गई, विभागीय अधिकारी ही इन्हें 'अर्दली के तौर पर 'अन ऑफिशियली ऐसे सर्वे कार्रवाइयों में शामिल कर ले जाते रहे हैं। सोना चोरी का मुख्य आरोपित रविन्द्र भी कोटा में पूर्व में हुई कई सर्वे कार्रवाइयों में शामिल रहा। यही नहीं, उसने अफसरों में खास अच्छी पहचान बनाई थी।
इन कार्रवाइयों में विभाग के कोटा, जयपुर, उदयपुर, जोधपुर , सवाईमाधोपुर सहित अन्य जगह पदस्थापित अधिकारी, निरीक्षक लगाए गए थे। साथ ही वहां संविदा पर कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर व अन्य कार्मिकों से भी सर्वे में काम लिया गया। सर्वे के दौरान निरीक्षकों को चाय नाश्ता, भोजन पहुंचाना, फाइल, दस्तावेजों को एक स्थान से उठाकर दूसरी जगह रखने तक के काम इनसे लिए गए। कागजी कार्रवाई को कम्प्यूटर पर अपलोड करने के काम भी ये ही करते।
चोरी की वारदात के बाद अब विभाग के अधिकारी इनसे तौबा कर रहे और इन्हें सिर्फ कम्प्यूटर का सामान्य वर्क ही देने के निर्देश जारी किए हैं।
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अब भरोसा नहीं
सहायक निदेशक एएल मीणा ने बताया कि अब संविदा कर्मचारियों पर विश्वास करना सभी ने कम कर दिया है। उनसे सिर्फ सामान्य कम्प्यूटर वर्क ही कराया जा रहा है। ऑफिस के महत्वपूर्ण दस्तावेज या विशेष काम जिम्मेदार अधिकारियों से ही कराया जा रहा है।
Published on:
25 Apr 2018 09:53 am
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