
कोटा जिले में चेचट के रीछी गांव के किसान परिवार ने दो ग्रीन हाऊस का निर्माण कर खीरा-ककड़ी की पैदावार ली है। दो-दो हजार वर्ग फीट की भूमि में उन्होंने इससे पांच माह में ही पांच लाख रुपए का मुनाफा कमाया है।
70 फीसदी तक अनुदान
किसान पेंशनर अध्यापक प्रभुलाल अहीर ने बताया कि खीरा-ककड़ी की खेती के लिए सामान्य कृषक को 50 फीसदी अनुदान मिलता है। सीमान्त, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति किसान को 70 फीसदी तक अनुदान मिलता है। ग्रीनहाऊस का निर्माण सरकार से मान्यता प्राप्त कम्पनी द्वारा किया जाता है। जिसमे खीरा-ककड़ी की बुवाई से लेकर फल आने तक बीज, दवाइयां व पौधा खड़ा करने के लिए वायर का एक लाख रुपए का खर्चा आता है। जिसका 50 फीसदी सरकार अनुदान देती है। दो हजार वर्ग फ़ीट भूमि में सरकार की 35 टन खीरा-ककड़ी पैदावार की लिमिट है। अगर किसान इससे अधिक पैदावार करता तो उद्यान विभाग उस किसान को जिला स्तर पर सम्मानित करता है। खीरा-ककड़ी की पैदावार 50 दिन में शुरू हो जाती है। जिसमे दो दिन में 12 क्विंटल खीरा-ककड़ी मिलना शुरू हो जाती है। पिछले चार वर्षों से यह किसान परिवार खीरा-ककड़ी की खेती कर रहा है। इससे प्रेरित होकर अन्य किसानों ने भी अपने खेतों में ग्रीन हाउस लगवा लिए।
सोलर पैनल से की जाती सिंचाई
खीरा-ककड़ी की सिंचाई करने के लिए सोलर पैनल का उपयोग किया जा रहा है। फसल में पानी व दवाई के छिड़काव के लिए सीरीज (बारीक़ पाइप लाइन) का उपयोग किया जाता है। तेज धूप व हवा के लिए विशेष प्रकार से ग्रीन हाउस में पर्दे लगे हुए हैं जिसको जरूरत के हिसाब से खोला व बंद किया जाता है। ग्रीन हाऊस का पांच लाख का पांच वर्ष का बीमा होता है। जिसका नुकसान पर किसान को हर्जाना मिलता है।
पांच लाख का मुनाफा
ग्रीन हाउस में एक साल में दो फसल तैयार होती है, जिसमें वाजिब दाम मिलने पर एक बार में आठ लाख की आय हो जाती है जिसमें से तीन लाख का खर्चा निकालने के बाद शुद्ध पांच लाख प्रति फसल का मुनाफा होता है।
मुरली मनोहर गुप्ता — चेचट
Updated on:
22 Jun 2023 12:41 pm
Published on:
22 Jun 2023 12:21 pm
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