
फोटो: पत्रिका
132वें राष्ट्रीय मेला दशहरा में 2 अक्टूबर को दहन के लिए रावण का 221.5 फीट का पुतला सोमवार को मैदान में आ डटा। यह दुनिया का सबसे बड़ा पुतला है। इस उपलब्धि के लिए कोटा का नाम एशिया और इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में दर्ज होगा।
दशहरा मेले के सफल और सुरक्षित आयोजन को लेकर जिला कलक्टर पीयूष समारिया ने मेला स्थल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने मेला समिति अध्यक्ष विवेक राजवंशी, शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम, नगर निगम उत्तर आयुक्त अशोक त्यागी तथा अन्य अधिकारियों से सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं और भीड़ प्रबंधन की स्थिति पर चर्चा की।
जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि मेले में आने वाले सभी आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और विशेष तौर पर बच्चों और बुजुर्गों के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
उन्होंने मेला में तैनात सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के साथ-साथ आपातकालीन सहायता केंद्रों को प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए। इसी दौरान रावण देखने आए बच्चों के साथ विजय श्री रंगमंच पर जिला कलक्टर की फोटो भी खिंची गई।
अब तक दुनिया में सबसे ऊंचे पुतले का रेकॉर्ड 2024 में दिल्ली के 210 फीट ऊंचे रावण के पुतले के नाम दर्ज है। इससे पहले 2019 में चंडीगढ़ में भी 221 फीट का पुतला बनाया गया था, लेकिन यह पुतला खड़ा नहीं हो पाया जिस कारण वह विश्व कीर्तिमानों की सूची में शामिल नहीं किया जा सका था।
मेला समिति अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के सुझावों के अनुसार कोटा दशहरा मेले को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए कई नवाचार किए गए हैं। मेले में परंपरा और आधुनिकता का संगम रखते हुए विभिन्न कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं। मेला दशहरा में अब तक 72 से 75 फीट के रावण के पुतले बनते आए हैं, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष की मंशा के अनुरूप इस बार 221.5 फीट का रावण का पुतला बनकर तैयार हो गया है। यह विश्व का अब तक का सबसे ऊंचा रावण का पुतला है। इस कीर्तिमान का रेकॉर्ड बुक में दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी की गई है।
कोटा के नाम इस कीर्तिमान को दर्ज करने के लिए एशिया और इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स के प्रतिनिधि रावण दहन के दिन कोटा आएंगे। वे अपने मापदंडों के अनुरूप पुतले को मापने की प्रक्रियाएं कर उसी दिन प्रमाण पत्र सौंपेंगे। इससे पहले नगर निगम के अभियंताओं की टीम ने सोमवार को पुतला खड़ा करने की प्रक्रिया से पहले पुतले का ड्रोन से मेजरमेंट किया। प्रारंभिक नाप-जोख में यह 221.5 फीट से भी कुछ अधिक ऊंचा है।
राष्ट्रीय दशहरे मेले में सोमवार को रावण का पुतला खड़ा करने से पहले भूमि पूजन किया गया। मेला समिति अध्यक्ष विवेक राजवंशी तथा मेला अधिकारी अशोक कुमार त्यागी द्वारा दहन स्थल पर बनाए गए सीमेंटेड फाउंडेशन पर भूमि पूजन किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ देवताओं का आह्वान किया गया।
निगम की इंजीनियरिंग टीम भी अधीक्षण अभियन्ता महेश गोयल के नेतृत्व में पूरे समय दहन स्थल पर मौजूद रहकर मॉनिटरिंग करती रही। दिनभर लोग दशहरा मैदान में रावण का पुतला देखने आते रहे। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा। कईं युवा रावण के साथ सेल्फी लेते भी नजर आए। यहां ढाई सौ फीट का सुरक्षा घेरा बनाया गया है।
यहां दहन स्थल पर 26 गुणा 24 का आरसीसी का सॉलिड फाउंडेशन तैयार किया गया था। इसमें आठ स्टील की जैक वाली रोड लगाई गई थी। साथ ही, आठ लोहे के रस्से से रावण को सपोर्ट दिया गया। पेडस्टल पर फिश प्लेट को जॉइंट किया गया। इन पर 8 नट की चूड़ियों से रावण का पुतला खड़ा किया गया। पुतले को खड़ा करने में 220 टन एवं 100 टन की हाइड्रोलिक क्रेन काम में ली गई।
रावण का पुतला पहले की अपेक्षा काफी लंबा होने के कारण एकदम स्लिम लग रहा है। चेहरे पर बड़ी-बड़ी मूछें रौबदार नजर आ रही हैं। चेहरा फाइबर ग्लास से बना है। 60 फीट के रावण के मुकुट में रंगबिरंगी एलईडी लाइट लगाई गई है। पुतले को लाल, हरे और नीले रंग के कपड़ों से कवर किया गया है।
युवा अवस्था में रावण का पुतला बनाने का काम शुरू किया था। इसके बाद तो यह काम जुनून बन गया। साल दर साल रावण के पुतले का कद बढ़ता चला गया। बड़े पुतले बनाने लिए लोहे के स्ट्रक्चर का सहारा लेना शुरू किया। इसके सहारे ही नई दिल्ली और अम्बाला में 200 फीट से ऊंचे रावण के पुतले बनाए। नई दिल्ली में वर्ल्ड रेकॉर्ड भी बना। कोटा में रावण के पुतला बनाने के लिए उन्हें पर्याप्त समय मिला।
कोटा में रावण का पुतला बनाने में ब्रिज बनाने की तकनीक अपनाई। मुख्य पिल्लर में लोहे के पाइप लगाने के अलावा इन्हें मजबूत करने के लिए कैंची की तरह स्ट्रक्चर बनाया। तीनों पुतलों के स्ट्रक्चर में 9 टन से अधिक लोहा लगाने के बाद इसकी एक-एक वैल्डिंग को हाथ से करने के बाद चेक किया गया और इस पर पेंट किया गया। पुतले के वजन से डेढ़ गुना अधिक वजन उठाने की क्षमता का स्ट्रक्चर तैयार किया गया।
पुतलों के पैर से मुकुट तक का स्ट्रक्चर लोहे का है। बरसात में खराब न हो इसके लिए पुतलों के चेहरे फाइबर से तैयार कर इन पर कलर की कई परतें चढ़ाई गई है। पुतलों को मजबूती से खड़ा रखने के लिए चारों तरफ लोहे के क्रेन में काम आने वाले तारों से आरसीसी स्ट्रक्चर पर बांधा गया है। इसके अलावा रावण को खड़ा करने के लिए आरसीसी के स्ट्रक्चर पर हाई मास्ट लाइट को खड़ा करने वाले बेस स्ट्रक्चर का बड़ा रूप बनाकर काम लिया गया है।
Published on:
30 Sept 2025 02:57 pm
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