
राजस्थान में डेंगू के नए वायरस की एंट्री, 4 जिलों में बरपाया कहर, अस्पताल हुए फुल, जानिए कैसे करता है अटैक
कोटा. आमतौर पर आने वाले बुखार को आप हल्के में बिल्कुल भी न लें, यह डेंगू भी हो सकता है। इसके लिए तुरंत चिकित्सक की सलाह लें। पिछले साल डेंगूके मरीजों में तीन तरह के लक्षण दिखाई दिए थे। इनमें साधारण डेंगू, डेंगू हेमरेजिक फीवर व डेंगू शॉकसिंड्रोम था, लेकिन इस बार डेंगू के वायरस ने अपना ट्रेंड बदला है। इसके चलते नई श्रेणी के मरीज देखने को मिल रहे हैं। इसे 'एक्सपॉन्डेड डेंगू ' सिंड्रोम का नाम दिया गया है। ( Expanded Dengue )
हाड़ौती में ज्यादातर मरीज इसी से प्रभावित मिले हैं। एक्सपॉन्डेड डेंगू में लिवर व रक्ततंत्र अधिक प्रभावित होता है। इसमें लिवर एन्जाइम व रक्त में पीलिया की मात्रा बढ़ी पाई जाती है। रक्त कणिकाओं विशेषकर श्वेत रक्त कणिकाएं और प्लेटलेट्स की संख्या कम देखने को मिल रही है। विशेष बात यह है कि प्लेट्लेटस की संख्या दस हजार या इससे कम होने पर भी रक्तस्त्राव के लक्षण सामने नहीं आ रहे।
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अब तक ये हुए एक्सपॉन्डेड डेंगू के शिकार
अलवर के बानसूर निवासी रजत गोयल 25 कोटा में एमबीबीएस पीजी की तैयार कर रहा था। पहले नॉर्मल बुखार की जांच करवाई। जांच में एक्सपॉन्डेड डेंगू की पुष्टि हुई। उसके बाद करीब दस से 12 दिन नए अस्पताल में भर्ती रहा। झालावाड़ के खुमान सिंह (21) व बूंदी जिले के बुद्धिप्रकाश ( 28) को भी एक्सपॉन्डेड डेंगू हुआ।
एसडीपी की संख्या बढ़ी
ब्लड में प्लेटलेट्स की मात्रा कम हो जाना डेंगू का सबसे बड़ा लक्षण है, मगर यह स्थिति दूसरी बीमारियों में भी हो सकती है। एक्सपट्र्स के मुताबिक डेंगू संक्रमण में सबसे पहले प्लेटलेट्स को नुकसान पहुंचता है, लेकिन इन दिनों डेंगू के डंक ने कोटा को परेशान कर रखा है। इसके चलते प्लेटलेट्स की मांग भी आम दिनों की तुलना में ज्यादा हो गई है। जानकारी के मुताबिक, कोटा में 8 ब्लड बैंक संचालित होते है। इनमें से 6 ब्लड बैंक में एसडीपी चढ़ाने की सुविधा है। इस सीजन में 6 ब्लड बैंकों में अब तक करीब 400 मरीजों को एसडीपी चढ़ाई जा चुकी है।
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क्या है एक्सपॉन्डेड डेंगू
डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया में पिछले कुछ वर्षों में डेंगू रोगी की बहुतायत जैसे ब्लडप्रेशर, मधुमेह रोगी, वृद्ध, बच्चे व युवा में पाई गई। इसके चलते कारण रोग के विभिन्न व असामान्य लक्षण देखने को मिले, जो पहले की तीन श्रेणी में उपयुक्त नहीं बैठे। इसे ही एक्सपॉन्डेड डेंगू का नाम दिया गया।
बचाव के लिए यह सावधानी बरतें
बुखार की शुरुआत में ही चिकित्सकीय परामर्श व आवश्यक जांच करवाकर शीघ्र उपचार शुरू कराएं। शरीर में जल, लवण की मात्रा व तरल पदार्थ अत्यधिक लें। अच्छे आहार से शरीर में कैलोरी की आवश्यकता की पूर्ति की जाए। पूरी आस्तीन के कपड़े पहने, शरीर को ढंक कर रखें। फ्रीज व कूलर को साफ रखें।
इस बार अंग के अनुरूप प्रभावित लक्षण
लिवर/आहार तंत्र : हेपेटाइटिस, पीलिया, पित्ताशय, अग्नाशय संक्रमण
किडनी : अचानक से पेशाब की मात्रा घट जाना, किडनी फेलियर।
ह्दय : ह्दयघात व धकडऩ की अनियमितता।
श्वसन तंत्र : फेफड़ों में रक्तस्त्राव व सूजन आ जाना।
मांसपेशियां : मांसपेशियों में सूजन आ जाना, बदन दर्द व एठन।
अस्थि मज्जा (ब्रेन हेमरेज ) : शरीर में श्वेत रक्त कणिकाओं की कमी, प्लेटलेट्स की कमी, तिल्ली फटना।
न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका तंत्र) : बच्चों में मिर्गी के दौरे, मस्तिष्क ज्वर, मैनिनजाइटिस, ब्रेन हेमरेज।
हाड़ौती में भी ज्यादातर मरीज एक्सपॉन्डेड डेंगू के मिले हैं। इसकी शुरुआत साधारण बुखार से ही हो रही है। अंग के अनुरुप अलग-अलग लक्षण मिल रहे हैं। इसी कारण डेंगू होने पर मरीज की प्लेटलेट्स की संख्या लगातार घटती है। आबादी के अनुरुप डेंगू रोग फैल रहा है, लेकिन उस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
डॉ. मनोज सलूजा, आचार्य, एमडी मेडिसिन, मेडिकल कॉलेज
Published on:
02 Nov 2019 02:19 pm
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