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बिगड़ रही माटी की सेहत, कृषि उत्पादन में आ रही कमी

पानी का बढ़ रहा पीएच, भूमि में बढ़ रही लवणीयता मिट्टी व पानी की जांच में हुआ खुलासा

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बिगड़ रही माटी की सेहत, कृषि उत्पादन में आ रही कमी

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कोटा. हाडौती की धरा की सेहत बिगड़ रही है। भूमि के पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ने से एक ओर जहां पानी का पीएच बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ भूमि की लवणीयता व क्षारीयता बढ़ती जा रही है। जिसका सीधा प्रभाव आम आदमी से लेकर पशुओं के जीवन चक्र पर पड़ रहा है। यह खुलासा अवधि अप्रेल 22 से मार्च 23 तक सुल्तानपुर ब्लॉक में मृदा जांच परीक्षण प्रयोगशाला में लिए सैम्पल की रिपोर्ट में हुआ है।
सुल्तानपुर ब्लॉक क्षेत्र में अमरपुरा, सिमलिया व दीगोद समेत कुछ गांवों को छोड़कर अधिकांश जगह भूमि की सेहत बिगड़ गई है। कृषि अधिकारियों के मुताबिक जिला लैब में जाने वाले 99 प्रतिशत सैम्पल में नाइट्रोजन की कमी है। 41 प्रतिशत में आयरन, 20 प्रतिशत में जिंक की कमी आई है। वहीं कई सेम्पल में सल्फर, मैंगनीज और कॉपर की कमी आ रही है।

भूमि के बंजर होने का खतरा
यहां पानी का पीएच इतना बढ़ गया कि सिंचाई करने पर भूमि के बंजर होने का खतरा बना हुआ है। गौरतलब है कि सुल्तानपुर ब्लॉक में अप्रेल 2022 से मार्च 2023 तक कुल 4000 से अधिक सैम्पल लेकर जांच के लिए भेजे थे। कृषि अधिकारियों की माने तो कुल भूमि में से करीब 25 प्रतिशत तक भूमि की उत्पादकता गिर गई है। फसल चक्र बिगड़ गया है। पिछले पांच साल में 6 हजार हेक्टेयर तक भूमि बंजर हो गई है।

इसलिए गिर रहा है उत्पादन
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी मिट्टी में पौधे की बढ़वार के लिए नाइट्रोजन की मात्रा सामान्य होना आवश्यक है। इसके असमान होने से फसल की बढ़वार अपेक्षा से कम होती है। मिट्टी के जिंक का काम रोग प्रतिरोधक क्षमता के रूप में होता है। मिट्टी में फास्फेट तत्व फसल की जड़ों और दाने को मजबूत करता है।

इस कारण बिगड़ी स्थिति

रसायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से जमीन सेहत खो रही है। मुख्य और सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी वाली मिट्टी में पैदा किए जा रहे गेहूं, दलहन और सब्जियों में पोषक तत्व कम होने लगे हैं। इसका सीधा नुकसान लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हुई हैं। दांत और आंखों के रोग भी बच्चों को घेर रहे हैं। मिट्टी में मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस व जिंक की कुछ एरिया में 40 से 50 फीसदी तक कमी हो गई है। सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, लोहा, सल्फर और कैल्शियम की मात्रा हर साल घट रही है।
यूरिया और कीटनाशी भी प्रमुख कारण

मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी व अधिक मात्रा में यूरिया खाद के प्रयोग से खेती की जमीन बंजर बनती जा रही है। किसान मिट्टी की जांच करवाए बिना अधिक पैदावार के लिए अंधाधुंध यूरिया, डीएपी व अन्य रसायनिक खाद का प्रयोग करते हैं। इससे खेती की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है और धीरे-धीरे जमीन बंजर हो जाती है। कृषि विभाग के अनुसार हर साल रबी और खरीफ सीजन के दौरान एक लाख मीट्रिक टन से ज्यादा उर्वरक का प्रयोग किया जाता है। पांच साल के दौरान 87 हजार लीटर कीटनाशक का प्रयोग किया गया है।
इस संबंध में सीएडी विभाग के जिला विस्तार अधिकारी डॉ. तनोज चौधरी ने बताया कि फसल में क्लोरोफिल नहीं बनने से प्रकाश संश्लेषण की कमी आती है। सूक्ष्म-तत्व भूमि की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होते हैं। किसान जैविक खेती की ओर लौटें और संतुलित मात्रा में रसायनिक खाद का उपयोग करें तो भी मिट्टी की सेहत सुधरने में कई साल लग जाएंगे। मिट्टी धीरे-धीरे खराब हुई है और यह धीरे-धीरे ही ठीक होगी।