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Good News: आरटीयू में बीटेक, एमटेक, एमबीए की रिक्त सीटों पर अब मिलेगा सीधे प्रवेश

यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) में विभिन्न ब्रांचों में प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर आया है।

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कोटा

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Nupur Sharma

Aug 28, 2023

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क/कोटा। यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) में विभिन्न ब्रांचों में प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर आया है। आरटीयू में कई ब्रांच की सीटें खाली रह गई। उनमें अब सीधे प्रवेश दिया जाएगा। इसमें रीप के फार्म भरने से चूके, गलत च्वॉइस भरने वाले या अब तक किसी संस्थान में प्रवेश नहीं मिला, वह प्रवेश ले सकते हैं। कम्यूटर साइंस के अलावा कई ब्रांच ऐसी भी हैं, जिनके बारे में विद्यार्थियों को पता नहीं है, जबकि उनमें भी रोजगार के अच्छे अवसर हैं।

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आरटीयू के डीन फैकल्टी अफेयर्स प्रो. ए.के. द्विवेदी ने बताया कि बीटेक के एयरोनोटिकल, सिविल, कम्प्यूटर साइंस, इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रोनिक इंस्ट्रूमेंटेशन एण्ड कंट्रोल, इलेक्ट्रिकल मैकेनिकल, प्रोडक्शन इंडस्ट्रीयल, पेट्रोलियम, पेट्रोकैमिकल इंजीनियरिंग, एमटेक, एमबीए के प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रमों में रिक्त रही सीटों के इच्छुक योग्य उम्मीदवार प्रवेश ले सकता है। इसके लिए आरटीयू की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। बीटेक प्रथम वर्ष में आवेदन की अंतिम तिथि 14 सितम्बर शाम 5 बजे तक है। इनकी काउसंलिंग 15 सितम्बर को होगी। इसके लिए मय दस्तावेज उपिस्थत होना होगा।

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प्रदेश के 213 मेडिकल संस्थान नहीं दे रहे स्टूडेंट्स को स्टाइपेंड: देश के विभिन्न प्राइवेट मेडिकल संस्थानों की ओर से मेडिकल स्टूडेंट्स को स्टाइपेंड नहीं दिए जाने की लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं। इन शिकायतों के निस्तारण को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन नई दिल्ली ने हाल ही गूगल-फॉर्म के जरिए एक सर्वे किया। सर्वे में कई चौंकाने वाले सत्य सामने आए। कई प्राइवेट मेडिकल संस्थान कार्रवाई से बचने के लिए मेडिकल पीजी स्टूडेंट्स को स्टाइपेंड की राशि जारी तो कर देते हैं, लेकिन फिर से उसे वापस ले लेते हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन ने सभी प्राइवेट मेडिकल संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन-2000 के नियमानुसार मेडिकल पीजी स्टूडेंट्स को स्टाइपेंड की राशि जारी करें, अन्यथा कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रदेशों के 213 प्राइवेट मेडिकल संस्थान स्टाइपेंड को लेकर नियमों का पालन नहीं करते हैं।