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शिखर पर पहुंचना काफी नहीं, बने रहना भी बेहद जरूरी..जानिए पाटनी से सफलता का फंडा….

एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में फैकल्टीज के मार्गदर्शन एवं मोटिवेशन के लिए इंटरनेशनल ट्रेनर, बिजनेस कोच एवं मोटिवेशनल ऑथर डॉ. उज्जवल पाटनी ने सफल इंसान बनने के बताए फंडे...

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कोटा

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Suraksha Rajora

Mar 06, 2019

kota news

शिखर पर पहुंचना काफी नहीं, बने रहना भी बेहद जरूरी...

कोटा. शिक्षक असीम क्षमता से पूर्ण होते हैं। एक शिक्षक पर ही निर्भर करता है कि कैसे एक प्रतिभावान विद्यार्थी की प्रतिभा को निखारा जा सकता है और कैसे एक औसत विद्यार्थी में प्रतिभा का विकास किया जा सकता है। शिक्षक ही राष्ट्र के असली निर्माता हैं।

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एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में फैकल्टीज के मार्गदर्शन एवं मोटिवेशन के लिए आयोजित कार्यक्रम 'मंथन' में इंटरनेशनल ट्रेनर, बिजनेस कोच एवं मोटिवेशनल ऑथर डॉ. उज्जवल पाटनी ने एक सफ ल इंसान बनने के फंडे बताए।

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उन्होंने कहा कि आप लोगों को एक मजबूत विजन के साथ आगे बढऩा होगा, ताकि विश्व में कहीं भी एजुकेशन की चर्चा हो तो लोग इंस्टीट्यूट का नाम अवश्य लें और यही आपकी असली सफलता होगी। क्योंकि शिखर पर पहुंचना ही काफी नहीं होता। वहां बने रहना भी जरूरी है। सेमिनार में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के निदेशक गोविन्द माहेश्वरी एवं बृजेश माहेश्वरी ने डॉ. पाटनी का शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर अभिनन्दन किया।

जिम्मेदारी को ऑनरशिप समझें - डॉ. पाटनी ने कहा कि आप किसी भी बिजनेस या प्रोफेशन में हो, सफ लता या असफलता की जिम्मेदारी आपकी खुद की है। किसी भी जिम्मेदारी को ऑनरशिप समझेंगे तो यकीन मानिए आप कभी गलती नहीं करेंगे। आप सिर्फ यह सोच रखिए कि यह कार्य क्षेत्र आपका है और इसे शिखर पर ले जाने की जिम्मेदारी आपकी है। प्रगति के मार्ग खुद ब खुद खुलते जाएंगे।

सेल्फ ऑडिट करें अंत में डॉ. पाटनी ने कहा कि आप सभी को प्रत्येक दिन रात में सोने से पहले खुद का ऑडिट करना चाहिए। जिसमें खुद से दो सवाल करें। आज मैंने ऐसा कौनसा काम किया जो मुझे नहीं करना चाहिए था और दूसरा सवाल कि आज मैंने ऐसा कौनसा काम किया जिस पर मुझे गर्व करना चाहिए। ऐसा निरंतर करिए। इससे जीवन में अवश्य बदलाव आएंगे।


सफलता के लिए ये करें 'एप्रिशिएट' : हमेशा अपने टीम मेम्बर्स के काम की प्रशंसा करें। क्योंकि इससे वो दुगुनी उर्जा से आपके लिए काम करेंगे।


अपोलोजाइज : माफ करने की आदत डालें। यदि आपसे भी कोई गलती हुई तो उसे स्वीकार कर माफी मांगे। इससे आपसी संबंध मजबूत बनेंगे।


एक्नॉलेज: किसी दूसरे के काम का क्रेडिट खुद नहीं लें, जो काम जिसने किया है, उसका क्रेडिट उसे दें। इससे उसका उत्साहवद्र्धन होगा।


एडवाइस : जीवन में सीखाने से ज्यादा बेहतर है, ज्यादा से ज्यादा सीखना। इसलिए हमेशा दूसरों की सलाह को भी सुनिए।