1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

लोग मजदूरी पर चले जाते हैं तब देता है जलदाय विभाग पानी, जानिये क्यों …

एक सप्ताह से जलापूर्ति शुरू हुई है लेकिन यह दोपहर के समय होती है जबकि यहां के लोग श्रमिक वर्ग के हैं तथा दिन में मजदूरी पर जाते हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

कोटा

•

image

Dheetendra Kumar Sharma

•

Updated: 22 Jul 2019, 7:00 AM IST

kota

मुकुन्दपुरा में एक खेत में लगे नलकूप पर पानी भरने के लिए महिलाएं।

-मुकुन्दपुरा के वाशिन्दों की पीड़ा

कोटा. बारिश को लेकर तो हाड़ौती में त्राहि त्राहि मच ही रही है, लाख दावों के बाद भी पेयजल के भी सुखद हालात नहीं है। जिला मुख्यालय से महज ३० किमी दूर मण्डाना पंचायत के वार्ड एक के मुकुन्दपुरा गांव में तो विकट हालात है। यहां वाशिन्दों के साथ अजीब ही त्रासदी सरकारी विभाग ने बना रखी है। जब भी बस्ती वाले इसे सुलझााने की मांग करते हैं, अधिकारी असंभव कहकर पल्लाझाड़ देते हैं।
दरअसल, जलदाय विभाग की अनदेखी के चलते पीने के पानी के लिए इस बस्ती को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। उन्हें न तो बोराबास पदमपुरा पेयजल योजना का लाभ समुचित रूप से मिल पा रहा है ना ही टैंकरों से जलापूर्ति का। वहां के बाशिन्दों को आसपास खेतों में लगे नलकूपों से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है।
क्या फायदा ऐसे वक्त...
ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर दो हैण्डपम्प लगे हुए थे। वो करीब चार पांच माह से रीत चुके हैं। यहां बोराबास पदमपुरा पेयजल योजना के अन्तर्गत दो जगह सार्वजनिक नल भी लगे हुए हैं। इनमें करीब एक सप्ताह से जलापूर्ति शुरू हुई है लेकिन यह दोपहर के समय होती है जबकि यहां के लोग श्रमिक वर्ग के हैं तथा दिन में मजदूरी पर जाते हैं। एेसे में इसका कोई फायदा नहीं मिलता। यह जलापूर्ति सुबह 8 बजे से पहले कर दी जाए तो लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है।
टैंकर भी नहीं आ रहे
जलदाय विभाग की ओर से दो टैंकरों से जलापूर्ति हो रही थी वो भी करीब एक सप्ताह से नहीं हो पा रही है। निजी नलकूपो ंसे पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि अभी खेतों में फ सल की बुवाई हो चुकी है। खेत मालिक भी आनाकानी करने लगे हैं।

अफसर बोले, बदलना असंभव
मामले में जलदाय विभाग के सहायक अभियन्ता साबिर रजा से जब पत्रिकाडॉटकॉम ने बात की तो उनका कहना था कि मुकुन्दपुरा गांव में पहले दो टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही थी, वर्तमान में 1 टैंकर से जलापूर्ति की जा रही है। ठेकेदार जलापूर्ति नहीं कर रहा है तो पता किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि पेयजल योजना से होने वाली जलापूर्ति का समय बदलना वर्तमान में असम्भव है। गांव मण्डाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है तथा यहां पर ब्लॉक वार जलापूर्ति की जाती है।