
mbs hospital
कोटा . सरकारी अस्पतालों में शुद्ध पेयजल के लिए मरीज व तीमारदारों का परेशान होना पड़ रहा है। नए अस्पताल व एमबीएस में तो ये हालत है कि स्टाफ व तीमारदारों को कैम्पर खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है।
इन अस्पतालों में पेयजल समस्या इतना गंभीर है कि चिकित्सक भी अपने घर से पानी लाते है या अपने विभाग में पानी का कैम्पर मंगाते हैं। एमबीएस में मरीजों के लिए शुद्ध पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। नलों में सीधा बोरिंग का पानी ही आ रहा हैं, जो पानी आ रहा है, उसकी गुणवत्ता भी चेक नहीं हो रही। कॉटेज वार्ड के पीछे अस्पताल प्रशासन ने एक बोरिंग खुदवा रखा है और वहां से पानी सीधा टंकियों में भर दिया जाता है।
क्षमता से ज्यादा चल रहे वाटर कूलर
अस्पतालों में मरीजों की संख्या अधिक है, ऐसे में अस्पतालों में जो वाटर कूलर लगे हुए हैं, वे अपर्याप्त हैं। लगातार पानी निकालने से पानी ठंडा नहीं हो रहा। कुछ वाटर कूलर बंद पड़े हैं। एमबीएस के इमरजेंसी सर्जिकल का वाटर कूलर नया है, लेकिन बंद पड़ा है। वहीं आउटडोर के बाहर सांसद कोष से लगाया गया वाटर कूलर भी खराब पड़ा है।
एक तिहाई वाटर कूलर खराब
एमबीएस चिकित्सालय में 17 वाटर कूलर हैं, जिसमें 5 बिल्कुल खराब हैं। 9 वाटर कूलर सामान्य पानी दे रहे हैं। केवल 3 वाटर कूलर में ठंडा पानी आ रहा है। इसके साथ ही नए अस्पताल में 5 वाटर कूलर खराब पड़े हैं। अधिकांश वाटर कूलरों में गंदगी रहती है, पानी नीचे बहता रहता है, निकास की व्यवस्था नहीं होने से पानी बदबू मारता है।
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हमारे यहां जो वाटर कूलर खराब हैं, उन्हें सही कराया जाएगा। साथ ही जिन कूलर में ठंडा पानी नहीं आ रहा तो उन्हें भी दिखवाएंगे। मरीजों और तीमारदारों को पीने के पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
डॉ. पीके तिवारी, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल
Published on:
27 Mar 2018 06:34 pm
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