
कोरोना वायरस का खौफ, होली पर चीन की नहीं, देसी पिचकारी से बरसेगा रंग
कोटा. होली में एक दिन ही बचा है, लेकिन भारत में भी कोरोना की दस्तक से जनता का जोश काफी हद तक ठंडा दिख रहा है । हालांकि फिर भी बाजारों में होली की दुकानें सज चुकी हैं और लोग खरीददारी भी जमकर कर रहे हैं। बाजार के ट्रेंड की बात करें तो इस बार रंगों के त्योहार होली पर हर्बल और ऑर्गेनिक कलर की डिमांड लगभग डबल हो गई है। जहां पहले 100 में से 50 लोग हर्बल और ऑर्गेनिक कलर मांगते थे, उनकी संख्या अब बढ़कर 80 हो गई है। इस बार होली की खरीददारी में एक बात और देखने को मिली। इस बार लोग चीनी पिचकारी और होली के अन्य सामानों से दूरी बनाकर चल रहे हैं।
कोरोना वायरस का असर इस बार होली के बाजार में साफ दिख रहा। कुछ दुकानों को छोड़ दें तो चाइना मेड आइटम इस बार बाजार में काफी कम दिख रहे। इस बार की होली पर चाइनीज नहीं, देसी पिचकारी से रंग बरसेगा। चाइनीज माल की सप्लाई बाधित होने से देसी की डिमांड बढ़ रही है। निर्माताओं से लेकर थोक विक्रेताओं के पास होली के आइटम खरीदने वालों के आर्डर खूब आ रहे।
निर्माता नरेंद्र गुप्ता बताते हैं कि उनकी कुछ पिचकारी कीमत से लेकर गुणवत्ता तक में चाइनीज माल के ऊपर भारी पड़ रही हैं। इससे इस बार देसी पिचकारियों के कारोबार में वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा। इसके अलावा चाइनीज सामान कम रहने की वजह से पिछले साल की तुलना में उसकी कीमत में 20 प्रतिशत इजाफा है। हर साल होली पर चाइनीज पिचकारी से मात खाने के बाद इस बार स्वदेशी बाजार को अच्छे संकेत मिल रहे। ऐसा, इसलिए क्योंकि कोरोना वायरस के भय ने चाइनीज उत्पादों पर ग्रहण सा लगा दिया। कोरोना के डर और सप्लाई बंद होने से चाइनीज पिचकारियों की कीमत में खासी बढ़ोतरी हो गई है।
कोरोना के डर से देसी सामान की मांग
चीन में कोरोना वायरस के कदम रखने के बाद से देसी माल की मांग बढ़ी है। इसके असर से स्थानीय बाजार वृद्धि कर रहा है। महंगे चाइनीज उत्पादों के स्थान पर देसी आइटम लोगों की पसंद बन रहे हैं। इसमें वाटर टैंक पिचकारी, स्प्रे, स्प्रिंकलर्स, गुलाल गन आदि देसी आइटम चीनी माल से बेहतर हैं। इस अवसर को भुनाने में कारोबारी कोई कसर नही छोड़ रहे।
होली का त्योहार 10 मार्च को मनाया जाएगा। इस त्योहार पर रंग गुलाल, स्प्रे, बैलून व स्ट्रे बैलून की खूब मांग होती है। चीन में बनने वाले इन आइटमों की मांग इस बार कम है। कोरोना वायरस के डर से स्टॉकिस्ट नया माल नहीं मंगा रहे हैं। बचे हुए पुराने माल को उसी भाव पर ग्राहकों को उपलब्ध करा रहे हैं। उपभोक्ता चीन में बने होली का सामान लेने में झिझक रहे हैं।
Published on:
07 Mar 2020 04:29 pm
