scriptरामगंजमंडी को डार्क जोन से निकालने की कवायद, 20 करोड़ की लागत से सुधारी 10 तालाबों की दशा | Patrika News
कोटा

रामगंजमंडी को डार्क जोन से निकालने की कवायद, 20 करोड़ की लागत से सुधारी 10 तालाबों की दशा

लाइम स्टोन खदानों की गहराई व बढ़ती आबादी के अनुपात में भूमिगत जल का दोहन करने से लम्बे समय से डार्क जोन का दंश झेलने वाले रामगंजमंडी तहसील के गांवों का भूमिगत जल स्तर बढ़ाने के लिए पारम्परिक जल स्रोत की सार संभाल का कार्य उपखंड में तालाबों के जीर्णोद्धार के रूप में शुरू हुआ है।

कोटाJun 23, 2024 / 06:40 pm

Haboo Lal Sharma

takab

लाइम स्टोन खदानों की गहराई व बढ़ती आबादी के अनुपात में भूमिगत जल का दोहन करने से लम्बे समय से डार्क जोन का दंश झेलने वाले रामगंजमंडी तहसील के गांवों का भूमिगत जल स्तर बढ़ाने के लिए पारम्परिक जल स्रोत की सार संभाल का कार्य उपखंड में तालाबों के जीर्णोद्धार के रूप में शुरू हुआ है। इन तालाबों के पुनर्निर्माण पर 20 करोड़ से ज्यादा की राशि व्यय हुई है। बरसात में पहली बार इन तालाबों में भरने वाला पानी आसपास के गांवों का भूमिगत जल स्तर में सुधार करता है तो किसानों के साथ आमजन को इसका फायदा मिलेगा।
रामगंजमंडी डार्कजोन भूमिगत जलस्तर बढ़ाने का प्रयास

रामगंजमंडी उपखंड में सबसे बड़ा उंडवा का तालाब करीब तीन सौ बीघा से ज्यादा भूमि में फैला हुआ है। सिंचाई विभाग ने इसे निर्मित करवाया था, लेकिन सीपेज होने से तालाब में जमा बरसाती पानी का ज्यादा भराव अब नहीं होता। इस तालाब में रेवा सिंचाई परियोजना का पानी जरूर आ जाता है। भानपुरा तहसील के नया गांव के तालाब को रेवा योजना से जोड़ा हुआ है। दूसरा बड़ा तालाब फावा का है, जिसका क्षेत्रफल करीब दो सौ बीघा का है। इस तालाब पर दो करोड़ 74 लाख की राशि व्यय हुई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस तालाब में पानी भराव होने का लाभ आसपास के करीब चार गांवों को भूमिगत जल में बढ़ोतरी के रूप में मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। धरनावद में भी करीब पचास हैक्टेयर भूमि में तालाब का पुनर्निर्माण किया गया है, जिस पर 2 करोड़ 67 लाख की राशि व्यय हुई है। यह तालाब नई दिल्ली मुंबई रेल लाइन के दूसरे छोर पर है। धरनावद में दो बड़े तालाब ओर भी है। नए तालाब के पुनर्निर्माण से भूमिगत जल स्तर बढऩे का सीधा लाभ जगपुरा के साथ धरनावद पंचायत से जुड़े गांवों के किसानों को मिलने लगेगा। अभी यहां के किसान बरसात की एक फसल पर आश्रित हैं। जल स्तर बढऩे पर दूसरी फसल भी वह ले सकेंगे।
बीस करोड़ खर्च, लेकिन देखरेख नहीं

अमरपुरा में 1 करोड़ 2 लाख, जुल्मी में 1 करोड़ 47 लाख, हथोना 1 करोड़ 24 लाख, घाटोली 1 करोड़ 90 लाख, मंडा 1 करोड़ 88 लाख, रिछडिय़ा 2 करोड़ 43 लाख, उदपुरा 3 करोड़ 6 लाख, मोडक 2 करोड़ 19 लाख लागत से तालाबों का स्वरूप बदलकर भूमिगत जल बढ़ाने का प्रयास हुआ है। बरसाती पानी से इन तालाबों में पानी का कितना लाभ पहुंचाता है यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन तालाबों पर व्यय होने के बाद उसकी सार संभाल के मामले में विभाग व जनप्रतिनिधियों को सजग रहना होगा।
तालाबों की सार सम्भाल तक नहीं होती

रामगंजमंडी में सिंचाई विभाग लम्बे समय से तालाबों का निर्माण कार्य करवा रहा है, लेकिन निर्माण के बाद उसकी सार संभाल नहीं होने से कुछ तालाब सर्दी खत्म होने के साथ दम तोड़ रहे हैं, जिसमें उंडवा का तालाब मुख्य है। इस तालाब में प्रवासी पक्षियों का समूह तक आता था। तालाब में जब पानी खत्म होने लगता है तो ऐसे पक्षी यहां से पलायन कर जाते है। लसुडिय़ा का तालाब सिंचाई विभाग ने बनाया, एक बार उसकी पाल टूटने के बाद उसकी सार संभाल तक नहीं हुई।
ताकली बाध से मिलेगी डार्क जोन से मुक्ति
रामगंजमंडी क्षेत्र में ताकली बांध लघु सिंचाई परियोजना के गेट जब लग जाएंगे तो भूमिगत जल में बढ़ोतरी होगी। 20 करोड़ लागत के तालाब व पुराने तालाबों की समयबद्ध तरीके से सिंचाई विभाग के साथ जनप्रतिनिधि नजर रखेंगे, तभी जल स्तर बढ़ोतरी का लाभ लोगों को मिल सकेगा।

Hindi News/ Kota / रामगंजमंडी को डार्क जोन से निकालने की कवायद, 20 करोड़ की लागत से सुधारी 10 तालाबों की दशा

ट्रेंडिंग वीडियो