
Election 2019 : नए दौर के नए नेता लेकिन चुनाव जीतने के लिए अपना रहे बरसों पुराने टोटके..
कोटा. लोकसभा चुनाव के लिए तारीखों को ऐलान के साथ ही तमाम राजनीतिक दल चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। इसके लिए रैलियों की तैयारी , स्थानों की बुकिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट समेत कई काम युद्ध स्तर पर जारी है। लेकिन चुनाव प्रचार के नए दौर में नए नेताओं के साथ भी पार्टियां पुराने टोटकों को अपनाने से नहीं चुकती है। इसकी एक बानगी हर चुनावों में राजस्थान में देखने को मिल ही जाती है। दरअसल दोनों ही पार्टियां अपने बड़े नेताओं की रैलियों की शुरूआत चुनिंदा जगहों से ही करती है।
कांग्रेस को भाता है बारां, देवली और नागौर
राजीव गांधी, सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी हर बड़े चुनावों से पहले अपने प्रचार की शुरूआत बारां, देवली या नागौर से करते आए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बारां में चुनावी सभा को सबोंधित किया था।
सरकार के बड़े कार्यक्रम भी चुनिंदा स्थानों पर किए जाते हैं। भाजपा भी कई सालों से यही तरीका अपनाती आई है लेकिन शहर बदल जाते हैं।
कोटा, जयपुर और उदयपुर है भाजपा की पसंद
भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद बड़ी रेलियों का दौर मोदी के आने के बाद दोबारा शुरू हुआ था लेकिन प्रचार की शुरूआत के लिए शहरों का चयन आज भी पुराना ही है। भाजपा अपने प्रचार की शुरूआत कोटा, जयपुर और उदयपुर से करती है। इसका एक कारण यह भी है कि ये सभी शहर संघ और भाजपा के बड़े गढ़ है।
वसुंधरा के लकी चार्म है शाहनवाज
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी टोटकों के मामले में पीछे नहीं है। 2003 से लेकर 2018 तक प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झालरापाटन से कुल 4 चुनाव लड़े हैं। खास बात यह रही है कि सभी चुनावों में वसुंधरा राजे के नामांकन के वक्त शाहनवाज हुसैन झालरापाटन मौजूद रहें है। पिछले चुनावों मे ंजब शाहनवाज से इसका कारण पुछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं लकी पैन लेकर दिल्ली से आता हूं। राजे इसी पैन से अपना नामांकन भरती है। गौरतलब है कि वसुंधरा राजे ने झालावड़ सीट से 3 बार सांसद और झा. पाटन से चार बार विधायक रही हैं।
Published on:
13 Mar 2019 09:47 pm
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