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कोटा में अनदेखी से 253 करोड़ की जमीन पर हो गया अतिक्रमण

नगर विकास न्यास के अधिकारियों की अनदेखी के चलते पिछले कई सालों से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है। हाईकोर्ट में शपथ पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद भी न्यास ने न तो अतिक्रमण हटाया और न ही नया अतिक्रमण होने से रोका।

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कोटा. नगर विकास न्यास के अधिकारियों की अनदेखी के चलते पिछले कई सालों से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है। हाईकोर्ट में शपथ पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद भी न्यास ने न तो अतिक्रमण हटाया और न ही नया अतिक्रमण होने से रोका। जब यह मामला स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की जानकारी में आया तो इसकी पड़ताल की गई। खंडगावड़ी क्षेत्र में अब तक करीब 253.23 करोड़ की जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है। इस प्रकरण को लेकर राज्य सरकार के अंकेक्षण विभाग ने गंभीर श्रेणी का ऑडिट पैरा बनाया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार खंड गांवड़ी के खसरा नम्बर-7 पर अवैध अतिक्रमण को हटाकर अतिक्रमियों को बेदखल किया जाना था, लेकिन न्यास ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। नया अतिक्रमण रोकने के लिए फैसिंग तक नहीं की गई। राजस्थान नगर सुधार न्यास अधिनियम 1959 की धारा 92 ए के तहत 4 मई 2017 को सात दिन में अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया गया था। लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में खंड गांवड़ी में वर्तमान डीएलसी दर के अनुसार अतिक्रमण प्रभावित क्षेत्र 26.14 हैक्टेयर की कीमत 253.23 करोड़ रुपए आंकी गई है। अंकेक्षण रिपोर्ट में न्यायालय के आदेशों की पालना नहीं करने और अतिक्रमण नहीं हटाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही किए जाने की टिप्पणी भी की गई है। अंकेक्षण विभाग के पास 2015 में यह मामला सामने आया था और चालू वित्तीय वर्ष में यह गंभीर आक्षेप की श्रेणी में शामिल किया गया है। पिछले कई सालों से पर्यावरण प्रेमी यहां पेड़ों को बचाने, नया अतिक्रमण होने से रोकने, मिट्टी का कटाव रोकने और जीव जंतुओं की रक्षा के उपाय करने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि पुराना अतिक्रमण हटाने में दिक्कत है तो कम से कम नया अतिक्रमण नहीं होने दें। इसलिए सरकारी जमीन की फैसिंग या चार दीवारी कराई जानी चाहिए। जिला कलक्टर उज्जवल राठौड़ ने गत 28 जनवरी 2021 को आदेश जारी के न्यास को निर्देश दिए थे, लेकिन इनकी पालना नहीं हुई। इस आदेश के अनुसार अतिक्रमण से मुक्त भूमि पर मृदा क्षरण को रोकने के लिए पेड़ लगाने के साथ फेङ्क्षसग की जानी थी। इसकी पूरी तरह पालना नहीं हुई है। स्थानीय निवासियों को चम्बल में कूड़ा करकट डालने से रोकने के भी उपाय करने थे। इसके अलावा इस क्षेत्र में मोर, चिडिय़ा, गोयरा, कबर बिज्जू, गोयरी, अजगर, सांप के संरक्षण के लिए भी कदम उठाने के निर्देश थे। वहीं नियमन से प्रतिबंधित श्रेणी के अतिक्रमणों को हटाने के भी निर्देश दिए थे।

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